बुलंदशहर में ₹10/लीटर गोमूत्र खरीद का पायलट प्रोजेक्ट; महिलाओं की बढ़ी आमदनी, पर योजना पर छिड़ा सियासी संग्राम’
बुलंदशहर में ₹10/लीटर की दर से गोमूत्र खरीद का पायलट प्रोजेक्ट शुरू! FPO 'नर्सैना ऑर्गेनिक' के जरिए खाद और कीटनाशक बनाने की पहल। 300 से अधिक महिलाओं को मिला रोजगार। सपा ने बताया चुनावी पैंतरा व आलू किसानों का मुद्दा उठाया, तो बीजेपी का पलटवार— "सपा नए प्रयोगों की विरोधी।" पढ़ें PNN24 की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट।

तारिक खान
लखनऊ (PNN24 News): उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में गोमूत्र खरीद और उससे प्राकृतिक उत्पाद तैयार करने की एक अनूठी योजना शुरू हुई है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत पंजीकृत ‘नर्सैना ऑर्गेनिक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड’ (FPO) ने गोमूत्र से प्राकृतिक खाद और जैविक कीटनाशक (Pesticides) बनाने का यह पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है।

🥛 15 गांवों से रोजाना 500 लीटर गोमूत्र की खरीद, 300 महिलाएं जुड़ीं
बुलंदशहर की स्याना तहसील के नरसैना गांव से शुरू हुए इस प्रोजेक्ट में आसपास के 15 गांवों को जोड़ा गया है।
FPO के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) डॉ. प्रवीण कुमार (जो प्लांट ब्रीडिंग में पीएचडी हैं) ने बताया:
- पायलट प्रोजेक्ट के तहत 15 गांवों में गोमूत्र डेयरी खोली गई है।
- ₹10 प्रति लीटर की दर से महिला समूहों द्वारा गोमूत्र खरीदा जा रहा है।
- फिलहाल लगभग 300 महिलाएं इस मुहिम से जुड़ी हैं, जो प्रतिदिन 8 से 10 लीटर गोमूत्र इकट्ठा करती हैं।
- रोजाना करीब 500 लीटर गोमूत्र एकत्र कर 6,000 वर्ग फुट में फैले प्रोसेसिंग प्लांट में लाया जाता है।
- यहां गोमूत्र में कई जड़ी-बूटियों को मिलाकर उबाला जाता है, जिससे लिक्विड, पाउडर और दानेदार जैविक खाद व फफूंदनाशक का निर्माण किया जा रहा है।
🔬 क्या कहते हैं वैज्ञानिक?
बांदा कृषि विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शैलेंद्र चौरसिया के अनुसार, वैज्ञानिक साक्ष्यों और शोधों से यह स्पष्ट होता है कि गोमूत्र में जैव-कीटनाशक और फफूंदनाशक (Fungicide) गुण मौजूद होते हैं।
ICAR-NCIPM और IARI के फील्ड अध्ययनों में देखा गया है कि जब गोमूत्र को नीम जैसे वानस्पतिक अर्क के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है, तो यह टमाटर के फल छेदक कीट पर 70-80% तक प्रभावी नियंत्रण दिखाता है और पैदावार में सुधार करता है।
⚔️ सपा और बीजेपी में तीखी जुबानी जंग
इस योजना को लेकर प्रदेश में सियासी पारा भी चढ़ गया है:
- समाजवादी पार्टी का रुख: सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने आरोप लगाया कि राज्य में आलू किसानों को ₹1/किलो का भाव भी नहीं मिल रहा और किसान फसल फेंकने को मजबूर हैं। सरकार बेरोजगारी, पेपर लीक और बुनियादी मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे प्रयोग कर रही है।
- भाजपा का पलटवार: बीजेपी प्रवक्ता आनंद दुबे ने पलटवार करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी नए प्रयोगों और किसान कल्याण की विरोधी रही है। योगी सरकार में गन्ने का समय पर भुगतान हो रहा है और किसानों को फसल का उचित मूल्य मिल रहा है।
उत्तर प्रदेश गौसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने स्पष्ट किया कि इस परियोजना को राज्य सरकार का पूरा समर्थन प्राप्त है और उत्पादित जैविक खाद कोऑपरेटिव के माध्यम से किसानों तक पहुंचाई जा रही है।











