वाह रे यूपी की राजनीति, बिजली भी अब हो गई हिन्दु-मुसलमां !

पीएम मोदी ने यूपी की रैली में बिजली को लेकर बयान दिया था कि समुदाय विशेष को ही बिजली मुहैया करायी जा रही है. . .

शबाब ख़ान

लखनऊ: यूपी में पांच चरणों का मतदान हो चुका है और अंतिम दो चरणों के लिए प्रचार जोरों पर है। प्रचार में एक-दूसरे पर निशाने भी जमकर साधे जा रहे हैं। एक मुद्दा जो हर दौर के साथ जोर पकड़ता जा रहा है, वह है बिजली का। पहले यूपी में बिजली नहीं रहती के आरोपों से शुरू हुआ यह खेल अब हिन्दू-मुस्लिम बिजली में बंट चुका है। प्रधानमंत्री ने अपनी एक रैली के दौरान इशारों में बिजली के बंटवारे पर यूपी में धार्मिक आधार पर भेदभाव का आरोप लगाया। आलोचना हुई तो कहा गया कि प्रधानमंत्री ने किसी एक धर्म की बात नहीं कही।

पत्रकारों से बातचीत में बिजली मंत्री पीयूष गोयल ने पीएम मोदी के बयान को सही ठहराते हुए कहा है कि ऊर्जा मंत्रालय की जांच में यह बात साबित होती है। पीयूष ने कहा कि मैंने जांच के लिए एक हाई लेवल की टीम भेजी थी और उस टीम ने जांच कर रिपोर्ट सौंपी। जब वे वापस आए तो कहा कि जब आप शहर में पैदल चलेंगे और लोगों से बात करेंगे तो देखेंगे कुछ घरों में बिजली मिल रही है और कुछ घरों में बिजली नहीं आ रही है। यह तरीका बिल्कुल ग़लत है। जहां विशेष रूप से एक समुदाय को फ़ायदा पहुंचाया जा रहा है। जबकि अगर आधिकारिक आकड़ों की बात मानें तो गोयल के इस बयान की कलई खुलती नज़र आ रही है।
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन पावर सेक्टर का सबसे बड़ा संगठन है। उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे समाजवादी पार्टी से ताल्लुक नहीं रखते हैं। यही नहीं वे अटल बिहारी वाजपेयी के बहुत करीबी रहे हैं। जब वाजपेयी लखनऊ से चुनाव लड़ते थे तो शैलेंद्र उन्हें चुनाव लड़वाते थे।
पीएम मोदी के बयान के बाद सबसे पहले शैलेंद्र दुबे ने यूपी पावर कारपोरेशन के कंप्यूटराइज्ड रिकॉर्ड में दर्ज डाला मीडिया को रिलीज कर कहा था कि पीएम का दावा गलत है। उनके मुताबिक, पिछले साथ ईद 6 जुलाई 2016 को मनाई गई। उस दिन यूपी को 13500 मेगावॉट बिजली दी गई। जबकि दिवाली के मौके पर धनतेरस से भैयादूज तक 28 अक्टूबर 2016 से 1 नवंबर 2016 तक 24 घंटे बिजली दी गई जो 15400 मेगावॉट थी।
पीयूष गोयल के दावे पर शैलेंद्र दुबे ने कहा कि अभी तक किसी टेक्नोलॉजी का अविष्कार नहीं हुआ जिससे सिर्फ मुसलमानों को बिजली दी जाए और हिन्दुओं को न दी जाए। बिजली फीडर से आती है। उस फीडर से जुड़े हर घर में लाइट आएगी। बिजली हर इलाके के ट्रांसफॉर्मर से आती है। तो उस ट्रांसफॉर्मर से कनेक्ट हुए हर घर में बिजली जाएगी। जाति और धर्म के मुताबिक किसी को बिजली देना और किसी को बिजली नहीं देना तकनीकी रूप से संभव नहीं है। ऐसा तभी मुमकिन है जब किसी ने बिजली का कनेक्शन ही न लिया हो। दूसरा बिजली का कनेक्शन उस इलाके का जेई करता है। यूपी पावर कारपोरेशन में हजारों जेई हैं और जाहिर सी बात है कि आबादी के लिहाज से ज्यादातर जेई भी हिन्दू हैं। क्या ये संभव है कि सारे जेई सिर्फ मुसलमानों को बिजली दे रहे हों। फिर हिन्दुओं के घर बिजली कौन देने आ रहा है इसलिए ऐसा लगता है कि पीयूष गोयल चुनाव के वक्त ध्रुवीकरण करने के लिए गलत बयानबाजी कर रहे हैं।
इस मामले पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए कहा कि हम शहरों में 22-24 घंटे बिजली दे रहे हैं। तार पकड़कर बताएं बिजली आ रही है या नहीं। जल्दी पता कर मुझे और राहुल गांधी को भी बता दें। इधर, अखिलेश के आरोपों पर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अखिलेश यादव सरेआम झूठ बोलते हैं। अखिलेश अपने पिता के नहीं हुए, हमें क्या बोल सकते हैं। केन्द्र से बिजली का पैसा आता है और ये भेदभाव करते हैं। हम ध्रुवीकरण नहीं विकास की बात करते हैं। केंद्र 2 रुपये में बिजली देता है और ये 8 रुपये वसूलते हैं।

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