सीबीआई विवाद: पूर्व सीबीआई चीफ आलोक वर्मा ने सेवा से दिया इस्तीफा, लगाया ये बड़ा इलज़ाम

हर्मेश भाटिया

नई दिल्ली. सीबीआई के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा ने सेवा से इस्तीफा दे दिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। इससे पहले वर्मा ने डीजी फायर सर्विस का चार्ज लेने से मना कर दिया है। उन्होंने कहा कि उनके मामले में प्राकृतिक न्याय को समाप्त कर दिया है। वर्मा ने कहा कि सीबीआई की साख को बरबाद करने की कोशिश हो रही है। जबकि सीबीआई को बिना बाहरी दबाव के काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैंने सीबीआई की साख बनाए रखने की कोशिश की है। लेकिन मेरे मामले में पूरी प्रक्रिया को उल्टा कर मुझे निदेशक के पद से हटा दिया गया है। इससे पहले अंतरिम सीबीआई निदेशक एम नागेश्वर राव ने पूर्व निदेशक आलोक वर्मा द्वारा किए गए तबादलों संबंधी फैसले को रद्द कर दिया है और अधिकारियों की आठ जनवरी वाली स्थिति बहाल कर दी है। राव ने शुक्रवार को जारी नए आदेश में घोषणा की कि वर्मा द्वारा दिए गए आदेश अस्तिव में नहीं हैं।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गुरुवार को सेलेक्शन कमेटी की बैठक में 2:1 से ये फ़ैसला लिया गया कि आलोक वर्मा को सीबीआई चीफ के पद से हटाया जाए। पैनल में मौजूद पीएम मोदी और चीफ़ जस्टिस के प्रतिनिधि के तौर पर मौजूद जस्टिस एके सीकरी वर्मा को हटाने के पक्ष में थे। वहीं पैनल के तीसरे सदस्य के तौर पर मौजूद लोकसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे आलोक वर्मा को हटाने के विरोध में थे। उन्होंने समिति को विरोध की चिट्ठी भी सौंपी। पैनल ने पाया कि सीवीसी ने आलोक वर्मा पर गंभीर टिप्पणियां की हैं। पैनल को लगा कि आलोक वर्मा जिस तरह के संवेदनशील संस्था के प्रमुख थे, उन्होंने वैसा आचरण नहीं किया। पैनल के मुताबिक सीवीसी को लगा है कि मोइन क़ुरैशी मामले में आलोक वर्मा की भूमिका संदेहास्पद है। आईआरटीसी केस में सीवीसी को ये लगा है कि जानबूझकर वर्मा ने एक नाम हटाया है। वहीं सीवीसी को कई दूसरे मामलों में भी शर्मा के खिलाफ सबूत मिले हैं। फ़िलहाल उन्हें डीजी फायर सर्विसेज़, सिविल डिफेंस और होमगार्ड का बनाया गया है।

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