जवाहिर पंडित हत्याकांड में आजीवन सजा पाए करवरिया बंधू को कैसे और कितनी मिल सकती है राहत, देखे क्या कहता है कानून

तारिक खान

जिले के अब तक के सबसे चर्चित हत्याकांड जवाहर पंडित हत्याकांड में अदालत करवरिया बंधुओं का उम्रकैद की सजा सजा सुना चुकी है। सामान्य तौर पर उम्रकैद या आजीवन कारावास की सजा को लेकर आम लोगों में कई प्रकार के भ्रम हैं। सामान्यत: लोग इसे 14 या 20 साल की कैद की सजा मानते हैं। आम धारणा है कि उम्रकैद का मतलब अंतिम सांस तक की सजा नहीं होता है। कई बार ऐसा भी सुनने में आता है कि उम्रकैद की सजा पाया बंदी 14 या 20 साल के बाद रिहा कर दिया गया।

क्या है संवैधानिक व्यवस्था

संविधान में उम्रकैद को लेकर कहीं नहीं लिखा गया है कि यह 14 या 20 वर्ष की अवधि की सजा होगी। अदालतें सजा का आदेश देते समय सिर्फ उम्रकैद या आजीवन कारावास का उल्लेख करती हैं। उसमें कोई वर्ष अंकित नहीं होता। संगीत व अन्य बनाम स्टेट ऑफ हरियाणा में वर्ष 2012 में सुप्रीमकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उम्रकैद का मतलब पूरे जीवन की जेल इससे अधिक कुछ नहीं। आजीवन कारावास का मतलब पूरे जीवन के लिए जेल।

राज्य सरकार को है सजा कम करने का अधिकार

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 432 में राज्य सरकार को अभियुक्त को दी गई सजा कम करने का अधिकार दिया गया है। इसके लिए पूरी प्रक्रिया निर्धारित की गई है जिसका पालन करके सरकार सजा को घटाने के लिए सजा सुनाने वाली अदालत से अनुमति मांग सकती है। 433 ए सीआरपीसी के अनुसार उम्रकैद की सजा पाए अभियुक्त को कम से कम 14 वर्ष की सजा काटनी होगी। इसका अर्थ है कि उम्रकैद की सजा पाए व्यक्ति की सजा यदि सरकार कम करना चाहती है तब भी उसे कम से कम 14 वर्ष जेल में काटने ही होंगे।

रिहाई से पूर्व देखना होगा आचरण

कानूनी प्रावधानों के अनुसार 14 वर्ष की सजा के बाद यदि सरकार किसी बंदी को छोड़ने का निर्णय लेती तो उसे कैदी के व्यवहार, बीमारी, पारिवारिक परिस्थिति आदि बिंदुओं को ध्यान में रखकर निर्णय लेना होगा।

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