रतनपुरा (मऊ) – एक सड़क जहा गड्ढो के बीच तलाशनी होती है सडक, गड्ढा मुक्त नही गड्ढा युक्त है यह मार्ग

बापू नंदन मिश्रा

रतनपुरा (मऊ)। प्रदेश सरकार जितना प्रचार नही करती उससे अधिक प्रचार स्थानीय नेताओं का रहता है। सोशल मीडिया पर न जाने कहा  कहा से तस्वीरे उठा कर जनपद को हाईटेक हो जाने का दावा भी अक्सर देखा जाता है। मगर जब इनको धरातल की असली तस्वीर दिखा दो तो फेक न्यूज़ कहकर मामले को हंसी में उड़ाने लगते है। सरकार गड्ढा मुक्त सड़क का दावा करती चली आ रही है। वही जनपद में एक दो नही कुल 13 किलोमीटर लम्बी एक सड़क गड्ढा मुक्त को उल्टा समझ बैठी है और गड्ढा युक्त सड़क हो चुकी है।

अमूमन सडको पर आपको गड्ढे दिखाई देते होंगे। कुछ रास्तो पर गड्ढे तलाशने होते है। मगर आज आपको मऊ जनपद के एक ऐसी सड़क से परिचित करवा रहे है जो गड्ढा मुक्त होने का भले दावा करती हो। मगर सडको के बीच आपको यहाँ गड्ढे नही दिखाई देंगे। बल्कि गड्ढो के बीच कही कही सड़के दिखाई दे जायेगी। या फिर कुछ इस तरीके से कहा जा सकता है कि गड्ढो के बीच सड़के है। न कि सडको पर गड्ढे।

हम बात कर रहे है विकासखंड रतनपुरा मुख्यालय से जनपद बलिया के भीमपुरा नं -1 को जाने वाली लगभग 13 किलोमीटर लंबी सड़क की। कई जगह टूट कर गड्ढे के रुप में यह सड़क तब्दील हो गई है। जिसमें बरसात का पानी जमा हो जाता है, जिससे अक्सर दुर्घटनाओ का सबब बनते रहते है ये गड्ढे।

इस रास्ते पर स्थित बिलौंझा चट्टी, भीमहर, सेमराजपुर आदि बाजारों में सड़क टूट कर गड्ढे में परिवर्तित हो चुकी है और यह गड्ढे भी इतने बड़े की  बारिश एक दिन हो जाय तो उनमें जमा पानी तो हफ्तों नहीं सूखने वाला है। ऐसे में इन गड्ढों में ईट के टुकड़े डालकर इसे ठीक करने का प्रयास जरूर किया गया है। किंतु यह टुकड़े बेतरतीब ढंग से उखड़ चुके हैं जो खासतौर से बाइक और साइकिल सवारों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। ऐसे में जबकि प्रदेश सरकार लगातार सड़कों को ठीक करने के निर्देश जारी कर रही है। इन सड़कों पर संबंधित अधिकारियों का ध्यान ना देना सरकार को मुंह चिढ़ाने जैसा है।

आम नागरिकों का कहना है कि स्थिति यही बनी रही तो किसी दिन भीषण दुर्घटना होगी और तब प्रशासन की नींद खुलेगी। ग्रामिणों का आक्रोश कब आंदोलन में बदल जाए यह कहना मुश्किल है। संबंधित विभाग के जिम्मेदार शायद उसी क्षण की प्रतिक्षा में हैं।

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