मुख़्तार अंसारी: अपनी सुरक्षा हेतु अदालत में गुहार लगाता 5 बार का पूर्व विधायक, मुख़्तार अंसारी के ज़िन्दगी के आखरी लम्हों में क्या हुआ?

तारिक़ आज़मी

डेस्क: योगी सरकार ने मुख़्तार अंसारी की मौत के मामले में न्यायिक जांच के आदेश दिए है और एक महीने में जाँच रिपोर्ट तलब किया है। पिछले कुछ दिनों से बाँदा जेल और अस्पताल से मुख़्तार अंसारी और उनकी बिगड़ती तबीयत के संकेत आ रहे थे। उनका परिवार भी यह आरोप लगा रहा था कि उन्हें धीरे असर करने वाला ज़हर देकर मारने की कोशिश की जा रही है।

मुख़्तार अंसारी के सम्बन्ध में पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम को देखने के बाद इस बात को समझने की कोशिश किया जा सकता है कि उन्हें और उनके परिवार को किस बात का अंदेशा था। बाँदा में मुख़्तार अंसारी की मौत के बाद उनका चेहरा देख कर अस्पताल से बाहर आए उनके छोटे बेटे उमर अंसारी कहते हैं, ‘पापा ने हमें खुद बताया है कि उन्हें स्लो प्वॉइज़न दिया जा रहा है। लेकिन कहां सुनवाई हुई।’ अब मुख़्तार अंसारी की मौत के बाद उनके बेटे उमर के साथ जेल से बातचीत का एक ऑडियो वायरल हुआ है। जिसमे मुख़्तार के बड़े बेटे विधायक अब्बास अंसारी की पत्नी निकहत अंसारी, मुख़्तार के छोटे बेटे उमर अंसारी और मुख़्तार के दरमियान जेल से हुई बातचीत है।

इस बातचीत की रिकॉर्डिंग अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है। इस काल रिकॉर्डिग में मुख़्तार अंसारी की आवाज़ में काफी कमज़ोरी नज़र आ रही है। मुख़्तार अंसारी अपने बेटे उमर से कहते हैं, ‘18 (मार्च) तारीख के बाद रोज़ा ही नहीं हुआ है। एक वक्त की नमाज़ ही नही पढ़ी है क्योकि पाक ही नही है। उमर ने अपने पिता से कहा कि ‘हाँ पापा मीडिया पर आपको देखा काफी कमज़ोर दिख रहे है।’

मुख़्तार को हिम्मत देते हुए उमर ने कहा कि वो अदालतों से उनसे मिलने की इजाज़त लेने की कोशिश में लगे हुए हैं। इस पर मुख़्तार ने अपनी जिस्मानी कमज़ोरी बताते हुए कहा कि वो ‘बैठ नहीं पा रहे हैं।’ जवाब में उमर कहते हैं, ‘हम देख रहे हैं पापा, ज़हर का सब असर है।’ मुख़्तार आगे कहते हैं, ‘अल्लाह अगर ज़िंदा रखे होगा, तो रूह रहेगी, लेकिन बॉडी तो चली जा रही है। अभी व्हीलचेयर में आए हैं और व्हीलचेयर में खड़े नहीं हो सकते हैं।’ इस पर उमर अपने पिता की हिम्मत बढाते हुवे कहते है कि ‘पापा सब ठीक हो जायेगा, हौसला रखे, हम लोग जल्द ही एक साथ हज और उमराह पर चला जायेगा।’ जिस पर निकहत ‘इंशाअल्लाह आमीन’ कहती है।

मुख़्तार और परिवार देता रहा अदालत में दुहाई

21 मार्च को मुख़्तार अंसारी के वकीलों ने मऊ की एमपीएमएल अदालत को बताया कि 19 मार्च बांदा के जेल प्रशासन ने उन्हें खाने में ज़हर देकर मारने की कोशिश की। वकीलों ने अदालत को बताया कि इसके पहले भी उन्हें दो बार जान से मारने की साज़िश हो चुकी है। कोर्ट को लिखे इस पत्र में उन्होंने भाजपा के बड़े स्थानीय नेताओं और बाहुबली नेताओं पर साज़िश में शामिल होने का आरोप लगाया। इस पत्र में जम्मू कश्मीर के एलजी का भी नाम है।

26 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने बाँदा के जेल अधीक्षक को मुख़्तार अंसारी को मेडिकल सुविधाएँ मुहैया कराने का आदेश दिया और कहा कि अगर मुख्तार अंसारी को किसी विशेष इलाज की ज़रूरत हो तो उसका भी इंतज़ाम किया जाए। 27 मार्च को, यानी मुख़्तार अंसारी की मौत के ठीक एक दिन पहले फिर मऊ की अदालत में सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का हवाल देते हुए मुख़्तार अंसारी के वकीलों ने अदालत से गुहार लगाई कि कोर्ट उनके मुवक्किल पर मंडरा रहे खतरों के मद्देनज़र उनकी सुरक्षा के लिए के लिए आदेश पारित करे। अगर कोर्ट में इतने संगीन आरोप लग रहे थे और जिसमें स्थानीय नेताओं और बाहुबलियों पर उनकी हत्या की साज़िश करने की बात रखी गई तो फिर प्रशसन को क्या कदम उठाने चाहिए थे?

सुप्रीम कोर्ट में मुख़्तार अंसारी के वकील दीपक सिंह ने कहा हैं कि ‘अगर लोकल अदालत में ज़हर देने का आरोप लग रहा है तो फिर ज़िला प्रशासन को मुख़्तार अंसारी के आस पास तैनात जेल स्टाफ को बदल देना चाहिए था। सरकार का कहना है कि दिल के दौरे से मौत हुई है, लेकिन जब तक पोस्ट मॉर्टम रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती है तब तक हम कुछ प्रमाणित तौर पर कुछ कह नहीं सकते हैं, क्योंकि प्रथम दृष्टया यह दिल के दौरे से मौत लग नहीं रही है।’

इस मामले में उमर अंसारी ने अपने ब्यान में कहा है कि ‘कोर्ट के न्यायिक रास्ते से आगे चलेंगे। हमें न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास है।’ मामले में संलिप्तता के बारे में उमर ने कहा, ‘हम कुछ नहीं कहना चाहेंगे, सब जांच का विषय है। जो अदालत फैसला करेगी हमको यकीन है कि वो इंसाफ़ है।’ इस पूरे मामले पर उत्तर प्रदेश शासन और पुलिस महकमे से कोई बयान नहीं आया है। ना ही मुख़्तार अंसारी के परिवार वालों द्वारा लगाए गए आरोपों पर कोई औपचारिक तौर पर सफाई दी गई है।

आईसीयु में भर्ती फिर चंद घंटो में ही डिस्चार्ज, उठ रहे अब बड़े सवाल

इसके पहले 26 मार्च को यानी मंगलवार की सुबह उमर अंसारी ने स्थानीय मीडिया को पुलिस से मिला एक रेडियो संदेश भेजा जिसमें लिखा था कि मुख़्तार अंसारी की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें बाँदा मेडिकल कॉलेज के ईसीयू में भर्ती कराया गया है। हमारे स्थानीय सहयोगी अनवर रज़ा रानू ने मौके से हालात ब्यान किया था। देर शाम मेडिकल बुलेटन आया और स्वास्थय को स्थिर बताया गया तथा फिर डिस्चार्ज कर दिया गया। डिस्चार्ज के समय मुख़्तार को व्हील चेयर से लाया गया जिस पर कमज़ोर साफ़ झलक रही थी और मुख़्तार चेयर पर ढंग से बैठ नही पा रहे थे।

मुख़्तार अंसारी के भाई और सांसद अफ़ज़ाल अंसारी जब उनसे बाँदा मेडिकल कॉलेज के आईसीयू से मिल कर बाहर निकले तो उन्होंने बाहर मौजूद मीडिया से कहा कि उन्हें मुख्तार से पांच मिनट मिलने का मौका मिला और वो होश में थे। अफ़ज़ाल अंसारी ने कहा कि उनके भाई मुख़्तार अंसारी का मानना और कहना है कि उन्हें खाने में कोई ज़हरीला पदार्थ खिलाया गया। अफ़ज़ाल ने कहा, ‘40 दिन पहले भी यह हो चुका है।’ अस्पताल में इलाज की कमियों के बारे में अफ़ज़ाल अंसारी ने कहा कि, ‘डॉक्टर ने बताया कि वो सर्जन हैं। मुख़्तार के पेट में कब्ज़ियत हो गई थी। एक सर्जन और उनके दो सहयोगी उनका इलाज कर रहे हैं। उन्हें समय से रेफर कर दीजिए।’

अफ़ज़ाल अंसारी के मुताबिक़ उन्होंने बाँदा मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल से मिलने की मांग की, लेकिन उनकी मुलाकात नहीं हो पाई। इस दरमियान अफजाल ने साफ़ साफ़ कहा कि ‘यह मुख़्तार पर जानलेवा हमला था और यह 7वा हमला था, किसी को इंतज़ार था कि मगर उसकी तमन्ना पूरी नहीं हुई।’ अफजाल ने आरोप लगाया था कि इस षड़यंत्र के सूत्र उसरचट्टी की घटना से मिलती है जिसमे ब्रिजेश सिंह के खिलाफ मुख़्तार को गवाही देना है और उसमे सज़ा हो जाने की संभावना अधिक है।

मुख़्तार के छोटे बेटे उमर अंसारी ने सवाल उठाते हुए कहते हैं, ‘जब उनकी तबियत बिगड़ी और उन्हें आईसीयू लाया गया तो मात्र 12 घंटे के अंदर इतना प्रेशर पड़ा कि डॉक्टर स्वतंत्र रूप से इलाज भी नहीं कर पाए। आईसीयू से इंसान वार्ड में या आईसीयू के बाद जो यूनिट होता है वहां जाता है। लेकिन आईसीयू के बाद सीधा जेल के तन्हा बैरेक भेज दिया गया। वहां उनको हार्ट अटैक हुआ और उसके बाद सब बात आपके सामने है।’ उमर अंसारी के इन आरोपों को अगर अब परिस्थियों से मिला कर देखे तो काफी सवाल पैदा होंगे। ऐसी स्थिति में उन आरोपों को भी ध्यान देने की ज़रूरत है जो मुख़्तार के परिवार ने अदालतों में अपनी गुहार में लगाया।

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