कानपुर – दो घंटे बाद निकलनी थी बारात, दूल्हा हुआ लापता, आज मिला दुल्हे का शव

आदिल अहमद

कानपुर। उन्नाव पुलिस लाइन के फालोवर काली प्रसाद शक्कर मिल, खल्वा में निवास करते है। हर पिता के तरह उनका भी अरमान अपने जवान बेटे को दूल्हा बनकर घोड़ी पर बैठा देखना था। वह अरमान पूरा होने वाला था। घर में शहनाई बज रही थी। बारात निकालने की तैयारी में थे। रविवार को काली प्रसाद के पुत्र मुरारी लाल की बारात काकादेव जानी थी। बारात तैयार हो रही थी। इस दरमियान मुरारी लाल सैलून अपनी दाढ़ी बाल बनवाने के लिए घर से ऐसा निकला और लापता हो गया।

बरात तैयार बैठी रही मगर मुरारी लाल का कोई पता नहीं चला। परिजन तलाश करते करते थक गए तो फिर पुलिस को सूचित किया और पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर उसकी तलाश शुरू की। आज सोमवार सुबह कैंट में गंगा किनारे उसका शव पड़ा मिला। शव के बाईं कलाई पर कटे के निशान मिले हैं। इससे खुदकुशी की भी आशंका है। वही पुलिस ने लाश को कब्ज़े में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया जहा मौत की वजह स्पष्ट नही होने के कारण विसरा सुरक्षित कर लिया गया है।

शादी की ख़ुशी को नज़र लग चुकी थी। शहनाई के जगह घर में करुण आवाज़े रोने की आ रही थी। दूल्हा जिसको घोड़ी पर बैठना था अब वह चार कंधो पर अपनी अंतिम यात्रा पर निकल गया था। शहनाइयो से मातमी धुन आ रही थी। बड़ा सवाल ये खड़ा हो रहा है कि मुरारी ने ख़ुदकुशी किया है या फिर उसकी हत्या किया गया है। वही शव पर हाथो की कलाई कटी होने के कारण मामला ख़ुदकुशी का भी समझ आ रहा है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक मुरारीलाल के बाएं हाथ पर कटे के निशान हैं। फोरेंसिक रिपोर्ट के मुताबिक ऐसा लग रहा है कि मुरारीलाल ने खुद ही नस काटने का प्रयास किया। हालांकि वो काट नहीं पाया। आशंका है कि कुछ जहरीला पदार्थ खाकर खुदकुशी की। हालांकि पुलिस का मानना है कि ऐसा लगता है कि मुरारीलाल शादी से खुश नहीं था। मामले की जांच जारी है, अभी स्पष्ट रूप से कुछ भी नहीं कहा जा सकता। परिजनों ने भी किसी तरह के आरोप नहीं लगाए हैं।

वही दूसरी तरफ रविवार को जब मुरारीलाल लापता हुआ तो युवती के परिजनों ने हंगामा किया। आरोप था कि मुरारीलाल शादी से बचने के लिए जानबूझकर लापता हो गया है। उन्होंने काकादेव थाने में शिकायत भी की। लेकिन जब मुरारीलाल का शव मिला तो वो भी शांत हो गए। अब मुरारी और युवती के घर पर खुशियों माहौल था। एक तरफ बरात जाने की तैयारी चल रही थी तो दूसरी तरफ काकादेव में बरात के स्वागत की तैयारियां चल रहीं थीं। कुछ ही घंटे बाद माहौल गमगीन हो गया। मुरारीलाल मजदूरी कर घर का खर्च चलाता था।

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