कानपुर – क्या सच को उजागर करने में गई पत्रकार आशु यादव की जान, गैंग रेप की खबर चलाना क्या बन गया पत्रकार की जान जाने का कारण

तारिक आज़मी

कानपुर। कानपुर के पत्रकार आशु यादव की लाश उसकी ही गाडी में संदिग्ध परिस्थियों में आज कानपुर पुलिस को बरामद हुई। दो दिनों से लापता आशु यादव एक दैनिक समाचार पत्र का स्थानीय ब्यूरो था। लाश जिस गाडी में मिली वह आशु यादव की गाडी बताई जा रही है। वही गाडी को देखकर प्रथमदृष्टतः लगता है कि गाडी में अच्छी खासी हाथापाई हुई होगी। गाडी के पास कुछ शराब की बोतले टूटी हुई मिली है। लाश मिलने की सुचना आने पर कानपुर पुलिस के हाथ पाँव फुल गए।

आशु यादव से लगभग तीन दिन पहले हमारे भी संवाददाता की बात फोन पर हुई थी। ये काल मेरे संवाददाता ने मेरे कहने से ही किया था। क्योकि जो स्क्रीन शॉट आप समाचार के साथ देख रहे है वह खबर आशु यादव ने उठाया था। आशु यादव ने सोशल मीडिया पर एक खबर लिख कर वायरल किया था कि खपरामोहाल में एक मानसिक विक्षिप्त युवती का गैंग रेप हुआ है। गैंग रेप की घटना को अंजाम देने वाले नामो का भी आशु यादव ने अपनी रपट में खुलासा किया था।

आशु यादव के रपट को अगर ध्यान दे तो क्षेत्र के बाहुबली पार्षद राजू सोनकर “अपना” के दबंग बेटो ने घटना को अनजाम दिया था। घटना का खुलासा न हो इस कारण रेप पीडिता मानसिक विक्षिप्त युवती को भी कही क्षेत्र के एक मकान में छुपा कर रखने की बात इस रपट में थी। मृतक पत्रकार आशु यादव की माँ के बयानों को आधार माने तो इसके बाद राजू सोनकर के लड़के और उसके साथी आशु यादव को जान से मार देने की धमकी फोन पर दे रहे थे। मृतक पत्रकार की माँ ने कहा कि पुलिस आशु यादव के मोबाइल में फोन रेकार्डिंग खुद सुन ले कैसे इस खबर को न प्रकाशित करने की धमकी वो दबंग दे रहे है।

अगर घटनाओं में दो और दो चार की कड़ी जोड़कर देखे तो इस रपट के वायरल करने के बाद दुसरे दिन से ही आशु यादव देर रात से लापता है। परिजनों ने इस समबन्ध में लिखित तहरीर स्थानीय थाने को दिए जाने का दावा किया है। अब अगर रेल बाज़ार पुलिस इस दो और दो चार की कड़ी को जोड़कर आशु यादव के लापता होने की घटना को गंभीरता से लेता तो शायद एक पत्रकार की जान बच सकती थी। वही दूसरी तरफ कानपुर पुलिस ने अगर रेप की इस कथित घटना पर प्रकाश डालते हुवे जांच तगड़ी किया होता तो शायद आज आशु यादव जिंदा होता।

क्या था खबर में जो बन गई जान की दुश्मन

मृतक पत्रकार आशु यादव ने अपनी रपट में खपरामोहाल निवासिनी एक लावारिस मानसिक विक्षिप्त युवती के साथ भाजपा नेता और पार्षद राजू सोनकर “अपना” के पुत्रो द्वारा गैंग रेप का खुलासा किया था। खबर में आशु यादव ने एक मकान नम्बर के साथ लिखा था कि क्षेत्र के हर एक इंसान को इस रेप की घटना के बारे में जानकारी है, मगर राजू सोनकर “अपना” से खौफ खाकर कोई मुह नही खोल रहा था। वही पुलिस के कार्यशैली पर भी आशु यादव ने बड़ा सवाल उठाया था।

आशु यादव ने अपने रपट में लिखा था कि उस मानसिक विक्षिप्त युवती के आगे पीछे कोई पुरसाहाल नही है। इसी वजह से घटना की जानकारी होने के बाद भी कोई नही बोल रहा है। आशु यादव की इस ख़ास रपट को ही उसकी ज़िन्दगी का दुश्मन लोग मान रहे है। चर्चाओं के अनुसार इस खबर के चलाने से नाराज़ राजू सोनकर “अपना” और उसके बेटो और उसके साथियों ने आशु यादव को काफी धमकी भी दिया था। मगर वो जाबाज़ पत्रकार इन धमकियों से डरने वाला कहा था। उसने रगड़ कर रपट तैयार किया। बस उसकी बदकिस्मती थी कि जितनी मेहनत उसने इस रपट के लिए किया था उसकी आधी भी अगर स्थानीय पुलिस कर लेती तो शायद आशु यादव आज जिंदा होता।

बहरहाल, मौजूदा समय में खुल्लम खुल्ला राजू सोनकर “अपना” पर पत्रकार की हत्या का आरोप लग रहा है। पुलिस ने अभी तक यानी समाचार लिखे जाने तक राजू सोनकर और उसके बेटो से पूछताछ तक की ज़हमत नही उठाई है। आशु यादव के साथ अप्रिय घटना कहा और कब घटी है इसका भी कोई मुकम्मल जवाब पुलिस के पास नही है। जवाब है तो केवल इतना कि आशु यादव के ऊपर कुल दस मुक़दमे है। मुकदमो की फेहरिश्त अगर आप देखेगे तो आपको भी समझ आयेगा कि मुक़दमे कितने गंभीर धाराओं में पंजीकृत है।

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