शाइन सिटी घोटाले – दो साल पहले PNN24 न्यूज़ ने शंका ज़ाहिर किया था कि शाइन सिटी करेगा बड़ा आर्थिक घोटाला, जाने कैसे गुड मोर्निंग की जगह “गुड मोर-अर्निंग” कहकर राशिद नसीम ने किया बड़ा घोटाला

लगभग दो साल पहले यानी 6 फरवरी 2019 को ही अगर हमारी खबर पर गंभीरता से वाराणसी पुलिस ने जाँच किया होता तो शायद ये घोटाला पहले ही रुक सकता था। शायद तब इस बड़े घोटाले के मास्टर माइंड राशिद नसीम और आसिफ नसीम पुलिस को बहुत आसानी से मिल गये होते। मगर तत्कालीन पुलिस विभाग के जिम्मेदारो ने इस बात पर गौर नही किया होगा कि आखिर दस लाख की कार को राशिद नसीम क्यों 6 लाख में देने की बात कर रहा है।

तारिक आज़मी

वाराणसी। वाराणसी पुलिस ने शाइन सिटी के नाम पर कई अरब के घोटाले का मास्टर माइंड राशिद नसीम और उसके भाई आसिफ नसीम के खिलाफ उसके प्रयागराज के करेली इलाके में रिहायशी मकान पर कुर्की की नोटिस चस्पा कर दिया है। गरीबो के मेहनत की कमाई लेकर रफूचक्कर हुआ राशिद नसीम और आसिफ नसीम कुख्यात आर्थिक घोटालेबाज़ है। इन दोनों भाइयो ने बड़ा फ्राड करते हुवे कई अरब का घोटाला किया है।

करेली के जीटीबी नगर स्थित भवन संख्या 1706/14 के निवासी राशिद नसीम और उसके भाई आसिफ नसीम ने शाइन सिटी नाम से एक संस्था का निर्माण कर लोगो को सस्ते आवास दिलाने के नाम पर बड़ा आर्थिक घोटाला किया। जब मियाद पूरी हुई तो बड़ी शानो शौकत बघारने वाले राशिद नसीम और आसिफ नसीम घोटाले की बड़ी रकम लेकर रफूचक्कर हो गए। अब पुलिस इनके अड्डो पर छापेमारी करती फिर रही है। इनकी गिरफ़्तारी के प्रयास किये जा रहे है। जबकि ये दोनों घोटालेबाज भाई फरार है। पुलिस ने अब इनके घर पर कुर्की नोटिस चस्पा किया है। वाराणसी पुलिस को उम्मीद है कि शायद कुर्की के डर से राशिद नसीम और आसिफ नसीम अदालत में सरेंडर कर दे।

वाराणसी के कैंट थाने के एसएसआई इन्द्रकांत मिश्रा ने प्रयागराज के करेली में जाकर राशिद नसीम के आवास पर नोटिस चस्पा किया। सीआरपीसी 82 के तहत चस्पा नोटिस में कुर्की की कार्यवाही का प्रावधान एक निश्चित समयावधि के बाद होता है। राशिद नसीम और उसके भाई आसिफ नसीम द्वारा शाइन सिटी के नाम पर लोगो से धन लेकर उनको आवास बनाने के आश्वासन का बड़ा आरोप है। हज़ारो लोगो से बड़ी बड़ी रकम लेकर उनके सपनो का आशियाना बना कर देने की बड़ी बड़ी बाते करने वाला राशिद नसीम और उसका भाई लम्बे समय से फरार है।

घोटाला तो और भी है बड़ा

फिलहाल पुलिस को आवास सम्बंधित घोटाले के सम्बन्ध में अभी तक शिकायत मिली है और लोगो ने अपनी शिकायत दर्ज करवाई है। अभी तक शाइन सिटी के बड़े अन्य घोटालो की तो शिकायत ही पुलिस के पास नही पहुची है। वो शिकायतकर्ता अपने एजेंट्स का सर खा रहे है और उनके कुछ दिनों के आश्वासन का तकिया लगा कर आराम कर रहे है कि आश्वासन पूरा होगा और हमको हमारे फंसे पैसे मिल जायेगे। वही सूत्र बताते है कि एजेंट्स और कंपनी के अन्य कर्मचारियो को राशिद नसीम ये तसल्ली अपने वौइस् संदेशो में दे रहा है कि जल्द ही शाइन सिटी फोरेक्स ट्रेड में आकर सबसे बकाया रकम को उतार देगी और सभी एजेंट्स के कमीशन और कर्मचारियों की तनख्वाह भी मिल जाएगी।

दो साल पहले ही ज़ाहिर किया था PNN24 न्यूज़ ने बड़े आर्थिक घोटाले की शंका

हमने आज से लगभग दो साल पहले ही यानी 6 फरवरी 2019 को इस कंपनी के द्वारा किसी बड़े आर्थिक घोटाले की शंका ज़ाहिर करते हुवे खबर लिखा था। हमने इस खबर को प्रमुखता से स्थान दिया था। हमारी खबर “वाराणसी- कप्तान साहब ध्यान दे कही ये कोई बड़ा आर्थिक घोटाला तो नही होने वाला है” में बताया था कि इस कंपनी के द्वारा किसी कथित स्कीम के तहत गाड़ियाँ बहुत ही कम दामो में बुक किया जा रहा है और बताया जो जा रहा है वह पूरी तरीके से शंका उत्पन्न करता है कि शाइन सिटी कोई बड़ा आर्थिक घोटाला करने वाली है।

हमारी 6/2/2019 को प्रकाशित खबर पढ़े –

वाराणसी- कप्तान साहब ध्यान दे कही ये कोई बड़ा आर्थिक घोटाला तो नही होने वाला है

इस खबर का संज्ञान लेकर ट्वीटर पर एक जाँच के आदेश की भी बात हमारे संज्ञान में आई थी। अब पुलिस ने प्रकरण में क्या जाँच किया। तत्कालीन थाना प्रभारी कैंट और क्षेत्राधिकारी ने क्या जाँच रिपोर्ट तत्कालीन एसएसपी वाराणसी को दिया ये विभाग का मामला है। मगर हमारी खबर देर ही सही मगर 100 फीसद सच साबित हुई। कंपनी ने एक बड़ा आर्थिक घोटाला कर डाला है। मगर सूत्रों की माने तो अभी ये घोटाले जो खुल कर सामने आये है वो कम है। अभी तक संज्ञान में आये आर्थिक घोटाले से कही अधिक का आर्थिक घोटाला राशिद नसीम और उसके भाई आसिफ नसीम ने अपने कर्मचारियों के साथ मिल कर किया है। बेहद सस्ते दामो में शोरूम से वाहन देने का वायदा करके भी काफी लोगो की रकम इस कंपनी ने हमारे अनुमान और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हज़म कर डाले है। अब वो कस्टमर अपने एजेंट्स का सर खा रहे है और एजेंट्स उनको आश्वासन की मीठी खुराक दे रहे है।

क्या थी इस कंपनी के ज़रिये गाडियों की कीमत और उसके एक्स शोरूम प्राइज

हमने अपने स्ट्रिंग के तहत जो जानकारी इस कंपनी के एक वीसी इंतज़ार मिया से इकठ्ठा किया था उसके तहत रॉयल इनफिल्ड 350 सीसी जिसकी एक्सशोरूम कीमत एक लाख 33 हज़ार से शुरू थी, की कीमत इस कंपनी के ज़रिये मात्र एक लाख रुपया पड़ रही थी। ज्यूपिटर स्कूटर जिसकी एक्स शोरूम कीमत 53 हज़ार 666 थी वह मात्र 32 हज़ार में मिल रही थी। पल्सर 150 सीसी जिसकी एक्स शोरूम कीमत 79 हज़ार थी वह मात्र 52 हज़ार में ये कंपनी देने को तैयार थी। केवल दो पहिया ही नहीं बल्कि कार भी ये कंपनी बुक कर रही थी।

क्या थी कार की कीमते कंपनी की और एक्स शोरूम प्राइज

कार की बात करे तो इनके द्वारा दिये गये आफर किसी के भी दिल में लालच भर सकते है। जीप जैसी महँगी कार ये 6 लाख एक्स शोरूम कीमत से कम में दिलवा रहे थी। वही स्कार्पियो एस3 जिसकी कीमत दस लाख से अधिक थी को यह कंपनी मात्र 6 लाख में देने का दावा कर रही थी। इसी तरह आल्टो 800 का दाम इस कंपनी के प्रतिनिधि द्वारा मात्र एक लाख 90 हज़ार में देने का दावा किया जा रहा था जबकि इस कार की कीमत एक्स शोरूम 2 लाख 66 हज़ार से शुरू थी। यानि पुरे 76 हज़ार कम में। सब मिला कर ये कंपनी हर गाडी लगभग 40% एक्स शोरूम कीमत से कम देने का दावा कर रही थी। बस इसके साथ इनके नियम और शर्ते लागू थी। आइये देखते है इनकी शर्ते क्या थी ?

क्या थे नियम व शर्ते

सबसे अधिक शक को दिल में बैठने वाली बात ये थी कि शाइन सिटी द्वारा ये मात्र बुकिंग किया जा रहा था। अर्थात आप वाहन की उनके द्वारा बताई गई रकम को उनके पास जमा कर देंगे और वह उसके बदले एक रसीद नुमा कागज़ आपको दे देंगे। उसके बाद वाहनों की डिलेवरी आपको 60 से 90 दिनों में मिलेगी। अब सवाल जायज़ हो सकता है उठाना कि जिस रसीद नुमा कागज़ को दिखा कर कंपनी ने उस समय हमको मुतमईन करने की नाकाम कोशिश किया कि वाहन आपको मिल जायेगा। उस रसीद को कंप्यूटर द्वारा शाइन सिटी के टैग लाइन पर प्रिंट कागज़ था जिसकी कोई भी वैधानिकता नही बनती है।

क्या हुआ था उस खबर के बाद 

हमने जब उस समय खबर लगाया था तो कंपनी में वक्त से पहले ही भगदड़ जैसी दिखाई दी थी। हमारे तत्कालीन सूत्रों ने बताया था कि इस आपाधापी में काम और गाडियों की बुकिंग ये कहकर रोक दिया गया था कि स्टॉक खत्म है जब आयेगा तब मिलेगा। मगर तब तक हज़ारो लोगो से इस कंपनी ने बुकिंग ले रखा था ये जानकारी हमको तत्कालीन सूत्र देते है। इसके बाद अपनी फ्राड टीम को मनोबल देने एक लिए खुद राशिद नसीम सामने आया था और खुद का सन्देश अपने टीम के लोगो को प्रसारित करके उत्तेजित न होने की बात कहकर खुद दुबई निकल लिया था। सूत्रों की माने तो इस दरमियान राशिद नसीम एक बार नेपाल में भी पकड़ा गया था और फिर वहा से जमानत करवा कर रफूचक्कर हो गया था। गुड मोर्निंग की जगह “गुड मोर अर्निंग” शब्द का प्रयोग करके ये सीधे साधे एजेंट्स को बेवक़ूफ़ बना कर खुद की शान-ओ-शौकत की ज़िन्दगी जीता था।

अब सूत्रों की माने तो गाडियों की बुकिंग करवा कर बैठे लोग या तो एजेंट्स की दीन भावना को देख कर अपने पैसे भूल चुके है अथवा उनके आश्वासन की मीठी दवा खाकर इंतज़ार कर रहे है कि कब उनकी बुक की गई गाडी मिलेगी। इस तरह के प्रकरण अभी पुलिस की चौखट तक नही पहुच पाए है ऐसा हमारे सूत्र बताते है। अब देखना होगा कि बड़े आर्थिक घोटाले की मार झेले लोगो को कैंट पुलिस कैसे इन्साफ दिलवाती है।

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