लाखों रुपये लगाकर बने कई सार्वजनिक टायलेट कुछ ही समय में तबाह, खुले में शौच करना हो गई मजबूरी

अजीत कुमार

प्रयागराज। सरकारी योजनाएं है तो बहुत अच्छी और उनसे लोगों को लाभ भी हो रहा है मगर स्थानीय जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता और लापरवाही की वजह से योजनाओं पर पानी फिर जाता है। यही हाल स्वच्छता अभियान का हो रहा है। खासतौर पर खुले में शौच पर रोकथाम के लिए बने शौचालयों की दशा तो बेहद खराब है। यहां तक कि लाखों रुपये लगाकर तैयार किए सार्वजनिक शौचालय भी तबाह होने लगे हैं तो इसके लिए प्रशासनिक मशीनरी ही जिम्मेदार है।

खंडहर जैसा होता जा रहा सार्वजनिक 

शहर से सटे झूंसी नगर पंचायत में लाखों रुपये की लागत से बने सार्वजनिक शौचालय बदहाल हो गए हैं। साफ सफाई व रखरखाव के अभाव में शौचालयों की दशा खराब हो गई है। इसमें लगाए गए नल, टाइल्स व सीट क्षतिग्रस्त होकर उखड़ गए हैं। इस वजह से अब लोगों को शौच के लिए खुले में जाना पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि तीन साल पूर्व नगर पंचायत द्वारा हर वार्ड में शौचालयों का निर्माण कराया गया था। लोग इसका इस्तेमाल भी करते रहे लेकिन रखरखाव में लापरवाही के कारण शौचालय की दशा बिगड़ती गई।

अब हालत यह है कि अधिकांश शौचालयों के दरवाजे भी टूट गए हैं। अंदर व बाहर लगे टाइल्स भी उखड़ गए हैं। नल की टोंटियां टूट गई है, हजारों लीटर पानी बेकार बह रहा है। शौचालयों की दशा खराब होने पर लोगों को शौच के लिए बाहर जाना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि झूंसी नगर पंचायत नगर निगम सीमा में आने के बाद भी कोई सुधार नहीं हो रहा है। सफाई व्यवस्था की हालत पहले से ज्यादा बदतर हो गई है। शिकायत करने पर नगर निगम के कर्मचारी सुनकर टाल जाते हैं। इससे लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। सबसे अधिक परेशानी घनी आबादी वाले मोहल्ले में रहने वाले लोगों को हो रही है। शौचालयों की दशा खराब होने से महिलाएं व बच्चे बच्चों को शौच के लिए बाहर जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

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