कड़क वर्दी के अन्दर की इन्सानियत – दुर्गाकुंड चौकी इंचार्ज ने पेश किया इन्सानियत की एक और मिसाल

ए जावेद

वाराणसी। पुलिस हमेशा आलोचनाओं का शिकार होती रहती है। मगर कोई उनके अच्छे कार्यो को जगजाहिर नही करता है। इस आपदा काल में पुलिस ने इन्सानियत की कई मिसाले पेश किया है जो नजीर कायम कर रही है। पुलिस के कट्टर विरोधी भी उसके इस आपदा काल में किये जा रहे इन्सानियत के कामो को सलाम कर रहे है।

ऐसा ही कुछ किया इन्सानियत से लबरेज़ उत्तर प्रदेश के तेज़ तर्रार दरोगाओ में गिने जाने वाले दुर्गाकुंड चौकी इंचार्ज प्रकाश सिंह ने। एक पत्रकार जिसने खुद 100 से अधिक लोगो को इस आपदा काल में सहायता किया और जब उसको खुद एक दवा की आवश्यकता पड़ी तो कोई नज़र नहीं आया। उसको आवश्यकता की दवा तलाश करके रात ढले 3 बजे उसके घर पर पहुचाने वाले दुर्गाकुंड चौकी इंचार्ज प्रकाश सिंह के इंसानी जज्बे की चर्चा और तारीफे हो रही है।

हुआ कुछ इस प्रकार कि वाराणसी के वरिष्ठ पत्रकारों में एक तारिक आज़मी के द्वारा इस आपदा काल में काफी लोगो को अपने पास से मुफ्त में अपने सहयोगियों की सहायता से ऑक्सीजन, दवाये और अन्य सहायता उपलब्ध करवाई जा रही थी। इसी क्रम में वाराणसी के कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा वरिष्ठ पत्रकारों ने एक व्हाट्सएप समूह बना कर इस आपदा काल में लोगो की मदद किया जा रहा है। इस व्हाट्सएप समूह को निर्माण करने में प्रख्यात समाजसेवी और इतिहासकार प्रोफ़ेसर मोहम्मद आरिफ, प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार ए के लारी, शहर के वरिष्ठ अन्य पत्रकारों अरशद आलम, तारिक आज़मी, संतोष चौरसिया, अनुराग पाण्डेय आदि ने मिलकर इस आपदा काल में लोगो की आवश्यकता के अनुसार उन्हें ऑक्सीजन, दवाये, ब्लड और अस्पतालों में बेड आदि उपलब्ध करवाने में सहायता प्रदान किया जा रहा है।

इस दरमियान विगत सप्ताह से तारिक आज़मी का स्वयं का स्वास्थ्य बिगड़ गया। उनका ऑक्सीजन लेवल कम हो गया। बुखार और सरदर्द सहित खासी की शिकायत पर एक निजी चिकित्सक के सलाह पर उनका इलाज चल रहा है। कल दोपहर बाद उन्हें चिकित्सक ने एक दवा “फेबिफ्ल्यु” लेने की सलाह दिया। पूरी टीम के द्वारा दवाओं के मार्किट में इस दवा की तलाश किया गया मगर दवा उपलब्ध नही हो सकी। इस हेतु व्हाट्सएप के उक्त समूह के समाजसेवियों और अन्य पत्रकारों ने कोशिश भरपूर किया। रात तक दवा उपलब्ध नही होने के स्थिति में इस दवा को दुसरे दिन अन्य जनपदों में तलाश करवाने की बात चल रही थी।

इसी दरमियान किसी ने इसकी जानकारी दुर्गाकुंड चौकी इंचार्ज प्रकाश सिंह को प्रदान कर दिया। पत्रकार से पूर्व परिचय और इंसानी जज्बे के कारण दिन भर थका देने वाली ड्यूटी करने के बाद आवास पर जाकर आराम करने पहुचे प्रकाश सिंह ने देर रात ही प्रयास जारी किया और प्रयास को सफलता मिली। दवा प्रदान करने के लिए सुबह का इंतज़ार किये बिना ही रात जब ढलने को बेताब थी तब 3 बजे भोर में ही उन्होंने उक्त दवा तथा एक ऑक्सीजन केन पत्रकार तारिक आज़मी के आवास पर ले जाकर खुद पहुचाया।

दुर्गाकुंड चौकी इंचार्ज के इस मानवीय कार्य की पत्रकारो के बीच चर्चा हो रही है। वही विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनके इस मानवीय कार्य की भूरी भूरी प्रशंसा किया है। प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता और इतिहासकार प्रो0 मोहम्मद आरिफ ने कहा है कि इंसानी जज्बे कड़क वर्दी के अन्दर भी होता है इसको दुर्गाकुंड चौकी इंचार्ज ने आज साबित कर दिया है। आज इस आपदा काल में उत्तर प्रदेश पुलिस जिस मानवता की मिसाले पेश कर रही है वह इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जायेगा।

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