वीआईपी के कार्यकर्ता हुवे नज़रबंद, फूलन देवी की पुण्य तिथि था बहाना, दरअसल सियासत पर लगा था निशाना

अनुराग पाण्डेय

वाराणसी: बिहार सरकार के मंत्री और विकास शील इंसान पार्टी (वीआईपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश सहानी ने विगत दिनों घोषणा किया था कि 25 जुलाई को उनकी पार्टी फूलन देवी की पुण्य तिथि बड़े ही धूम धाम से मनाएगी। इस हेतु 18 फिट की फूलन देवी की प्रतिमा भी लगाने की घोषणा हुई थी। मूर्ति भी आई मगर लगाने की जगह पर विवाद था। पार्टी के कार्यकर्ता जिस संपत्ति पर मूर्ति स्थापित करना चाहते थे वह जगह मंदिर की संपत्ति थी। पुलिस ने हस्तक्षेप किया और मूर्ति स्थापित नही होने दिया।

इसके बाद अलर्ट प्रशासन ने फूलन देवी के नाम पर सियासत करने वाराणसी पहुंचे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश साहनी समेत दो दर्जन कार्यकर्ताओं को नजरबंद कर दिया। रविवार को इसे लेकर पूरे दिन हंगामा चलता रहा। पुलिस प्रशासन का कहना था कि लॉक डाउन और सावन के मद्दे नज़र जनपद में धरा 144 लागू है। सियासी पार्टी ने अपने कार्यक्रम हेतु पूर्व अनुमति नही लिया हुआ है।

गौरतलब हो कि पिछले दिनों वीआईपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार सरकार के मंत्री मुकेश सहनी की ओर से उत्तर प्रदेश के सभी मंडलों में फूलन देवी की प्रतिमा लगाने का ऐलान किया गया था। तय कार्यक्रम के तहत 22 जुलाई को पार्टी कार्यकर्ताओं ने वाराणसी के रामनगर इलाके के सुजाबाद में प्रतिमा लगाने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने रोक लगाते हुए प्रतिमा को जब्त कर लिया था। पुलिस की कार्रवाई के बाद भी विकासशील इंसान पार्टी नहीं मानी और उसने 25 जुलाई को सांकेतिक विरोध करने का ऐलान किया। इस दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश साहनी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करनी थी।

वही पुलिस का कहना है कि वीकेंड लॉकडाउन और सावन के मद्देनजर शहर में धारा 144 लागू है। विकासशील इंसान पार्टी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए किसी तरह की परमीशन नहीं ली थी। इस क्रम में पुलिस ने रविवार की सुबह ही उस होटल को घेर लिया, जिसमें वीआईपी के कार्यकर्ता रुके थे। पुलिस ने होटल के अंदर और बाहर पहरा बैठा दिया। दोपहर में राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश सहनी को भी बाबतपुर एयरपोर्ट पर रोक दिया गया। पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ वीआईपी कार्यकर्ताओं ने हंगामा भी किया।

गौरतलब हो कि उत्तर प्रदेश में मल्लाह समुदाय का अच्छा ख़ासा वोट बैंक है। फूलन देवी मल्लाह समुदाय से आती थी। मल्लाह समुदाय उन्हें रोबिन हुड की छवि में देखता है। आने वाले विधान सभा चुनावों ने सियासी दल वीआईपी ने इसी वोट बैंक पर अपनी नज़र डाली और बिहार के साथ साथ उत्तर प्रदेश की सियासत में भी अपना पैर जमाने की कोशिश किया था। मगर उत्तर प्रदेश प्रशासन वीआईपी की सियासत के लिए नियमो को ताख पर रखने को तैयार नही हुआ और वीआईपी अपना कार्यक्रम नही कर सकी।

 

 

 

 



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