वक्फ संशोधन विधेयक लोकसभा में हुआ पेश, विपक्ष कर रहा जमकर हंगामा, पढ़े किसने क्या कहा अभी तक, चन्द्रबाबु नायडू और नीतीश कुमार के समर्थन से क्या केंद्र सरकार पास करवा लेगी विधेयक?, पढ़े क्या कहते है आकडे

तारिक खान

डेस्क: वक़्फ़ संशोधन बिल को पारित और चर्चा करने के लिए इसे केंद्र सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद में पेश कर दिया है। उन्होंने इस दौरान संसद में कहा कि जेपीसी के सामने अलग-अलग स्टेक होल्डर, अधिकारियों, सिविल सोसाइटी और धार्मिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी। इस विधेयक पर लोकसभा में आठ घंटे तक चर्चा चलनी है और ज़रूरत पड़ी तो इस समय को और बढ़ाया जा सकता है।

किरेन रिजिजू ने कहा, ‘जब हम बिल को सुधार कर ला रहे हैं तो आप इसे संविधान के अनुरूप नहीं बता रहे हैं। तर्क पर बात करो। लेकिन जो बात बिल में नहीं है, वो कर रहे हैं। ऐसा करके गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं।’ अल्पसंख्यक मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इसका मकसद ग़रीब मुसलमानों को फ़ायदा पहुंचाना है। किरेन रिजिजू ने कहा, ‘मुझे न केवल उम्मीद है, बल्कि मुझे पूरा यकीन है कि इस विधेयक का विरोध करने वालों के दिलों में भी बदलाव आएगा। हर कोई सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ इस विधेयक का समर्थन करेगा।’ जब उन्होंने कहा कि वक्फ़ क़ानून बाकी क़ानूनों से ऊपर है तो विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया।

हंगामे के बीच किरेन रिजिजू ने कहा, ‘इस विधेयक से किसी भी धार्मिक संस्था या धार्मिक कार्य में सरकार दख़ल नहीं देगी। वक़्फ़ बोर्ड किसी भी धार्मिक संस्था की व्यवस्था में हस्तक्षेप नहीं करेगी।’ उन्होंने कहा कि वक़्फ़ की संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन की ज़रूरत है क्योंकि इससे आमदनी नहीं होती है। इसमें महिलाओं और पिछड़े मुसलमानों को शामिल किया जाएगा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के वक़्फ़ संशोधन बिल को संसद में पेश करने और इसके पक्ष में तर्क देने के बाद कांग्रेस ने इसे संविधान के ख़िलाफ़ बताया। कांग्रेस के सांसद गौरव गोगोई ने संसद में कहा, ‘ये किस प्रकार का क़ानून आप बना रहे हैं। वक्फ़ बिल में संशोधन के लिए गठित जेपीसी के दौरान विपक्ष द्वारा सुझाए गए बदलाव खारिज कर दिए गए।’

उन्होंने कहा, ‘विशेष समाज के लोगों की ज़मीन पर इनकी नज़र है। कल दूसरे समुदाय की ज़मीन पर इनकी नज़र होगी। हम संशोधन के ख़िलाफ़ नहीं है। जो संसोधन ये लेकर आए हैं, उससे और समस्या बढ़ेगी।’ बहस में भाग लेते हुवे बीजेपी सांसद रवि शंकर प्रसाद ने कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों को लेकर कहा कि वो इसका विरोध मजबूरी में कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि ये सब सिर्फ़ वोट बैंक के लिए किया जा रहा है। सांसद रवि शंकर प्रसाद ने कहा, ‘आज मैं ये सवाल संसद के सामने उठाना चाहता हूं कि कितने स्कूल बने वक़्फ़ की संपत्ति पर? कितने अस्पताल बने वक़्फ़ की संपत्ति पर? कितने स्किल्स सेंटर खुले वक़्फ़ की संपत्ति पर?’

उन्होंने कहा कि ‘कितने अनाथालय खुले वक़्फ़ की संपत्ति पर? कितनी बेवा-विधवा बेटियों-महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई-बुनाई सिखाई गई? आज इस क़ानून के द्वारा वक़्फ़ की ज़मीन को रेग्युलेट करके, उसकी प्रॉपर्टी में फंडिंग अच्छी करके उस ज़मात के लोगों के लिए विश्वास बढ़ेगा, तो इनको (विपक्ष को) परेशानी क्यों होती है?’ इस बीच, लोकसभा में कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, ‘विशेष समाज के लोगों की ज़मीन पर इनकी नज़र है। कल दूसरे समुदाय की ज़मीन पर इनकी नज़र होगी। हम संशोधन के ख़िलाफ़ नहीं हैं, जो संशोधन ये लेकर आए हैं, उससे और समस्या बढ़ेगी।’

सदन में क्या है किसकी स्थिति समझे आकडे

मौजूदा लोकसभा में एनडीए की संख्या 293 है, जोकि 542 सदस्यों वाले निचले सदन में बहुमत से काफ़ी अधिक है। लोकसभा में इंडिया गठबंधन के सदस्यों की संख्या 234 है। जबकि बहुमत के लिए 272 वोटों की ज़रूरत है। 236 सदस्यों वाली राज्य सभा में भी एनडीए का संख्या बल 126 है, जोकि बहुमत के लिए पर्याप्त है। इनमें दो स्वतंत्र और छह नामित सदस्य हैं जो आम तौर पर सरकार का समर्थन करते हैं।

अब आती है एनडीए के घटक दलों की बात तो सबकी निगाहें चन्द्रबाबु नायडू, चराग पासवान और नीतीश कुमार की तरफ है। वक्फ संशोधन बिल को बीजेपी की अगुवाई वाली केंद्र की एनडीए सरकार लेकर आई है। नीतीश कुमार की जेडीयू और चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी भी एनडीए का हिस्सा हैं। इन दोनों पार्टियों ने बिल का समर्थन करने की घोषणा की है। एनडीए में शामिल अन्य दल शिव सेना (एकनाथ शिंदे गुट) और लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) ने भी अपने सांसदों को दो और तीन अप्रैल को संसद में मौजूद रहने और सरकार का समर्थन करने का व्हिप जारी किया है।

आर्थिक मामलों के अख़बार इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, टीडीपी ने बिल का समर्थन करने की घोषणा तो की है लेकिन लोकसभा में इसके सांसद बिल में कुछ बदलावों का प्रस्ताव देंगे। इसके अलावा टीडीपी ने सरकार से इस विधेयक को बीते समय से लागू न करने की अपील की। जेडीयू ने भी बिल का समर्थन करने की घोषणा की है। लोकसभा में टीडीपी के 16 और जेडीयू के 12 सदस्य हैं। बीजेपी के अपने 240 सांसद हैं और उसके लिए इन दोनों दलों का पूरा समर्थन संशोधन बिल के पास होने के लिए आवश्यक है। लेकिन इन दोनों की दलों की मुस्लिम अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच पैठ है। और इसलिए बिल के समर्थन की वजह से इसपर असर पड़ने की आशंका के चलते दोनों ही दल सावधानी बरत रहे हैं।

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