न खाता, न बही, जो कुख्यात बिल्डर शाहिद मौलाना कहे वही सही: विकास प्राधिकरण द्वारा बारम्बार सील होने के बावजूद भी नहीं थम रहा सीके 43/164 का निर्माण, एक और फ्लोर बनकर तैयार, तो बताये वीडीए के जेई सरकार, कौन ज़िम्मेदार ?

तारिक आज़मी
वाराणसी: वाराणसी विकास प्राधिकरण के द्वारा अवैध निर्माणों के खिलाफ जारी कार्यवाई को धता बताने वाले दुर्दांत बिल्डरो द्वारा शहर में अवैध निर्माण धड़ल्ले से जारी है। इसके लिए ज़िम्मेदारी किसकी है यह तो शायद अब वाराणसी विकास प्राधिकरण को तय करना होगा। बेशक ज़िम्मेदार तो कोई न कोई अन्दर का ही है। वरना किसी बिल्डर की भला कैसे मजाल हो सकती है कि बारम्बार सील भवन पर अवैध निर्माण करवाता रहे।

भवन संख्या सीके 43/164 को जब वाराणसी विकास प्राधिकरण ने 13 मई 2025 को सील किया तो वाराणसी विकास प्राधिकरण के द्वारा समस्त जिम्मेदारो को इसकी इत्तेला पत्र लिखा कर किया गया था कि उक्त निर्माण अवैध रूप से हो रहा है जिसको जी+3 पर सील कर दिया गया है। विकास प्राधिकरण के जारी पत्रांक संख्या सीके 31/23/(नो)वि0प्रा0/भवन (जोन-3) जिसकी प्रति हमारे पास सूत्रों के माध्यम से उपलब्ध है, से प्राप्त जानकारी चौकाने वाली है। यही नहीं इस पत्रांक का अवलोकन करे तो एक गंभीर अपराध का भी वाराणसी विकास प्राधिकरण इस पत्र के ज़रिये खुलासा करता है।

यह पत्र थाना चौक को प्राप्त है यह जानकारी हमारे विभागीय सूत्र पुख्ता तरीके से देते है और इसका साक्ष्य भी हमारे पास उपलब्ध है। मगर इन सबके बावजूद भी अवैध निर्माण में पीएचडी करके बैठा बिल्डर शाहिद मौलाना नहीं रोका और इसके द्वारा सील तोड़ कर काम जारी रहा। जिसके कई बार सुपरवाईज़र के ज़रिये खुद वाराणसी विकास प्राधिकरण के आला अफसरान ने जाँच करवाया है। चौक पुलिस ने अवैध रूप से निर्माण होने की बात सुनकर शाहिद मौलाना को घंटो तक पूछताछ भी किया। मगर शातिर दिमाग का मालिक और अवैध निर्माण में पीएचडी करके बैठा बिल्डर शाहिद मौलाना पुलिस को भी चकमा दे गया और शमन मानचित्र दाखिल करने की रसीद को कूटरचित तरीके से पेश करके निर्माण करने की अनुमति बता दिया।
सूत्र बताते है कि विकास प्राधिकरण द्वारा सील इस भवन पर रोज़ ही निर्माण कार्य हो रहा है। अन्दर एक आलिशान बेसमेंट बनकर तैयार हो गया है। सूत्रों का दावा तो यहाँ तक है कि बिल्डर के द्वारा कई दुकानों को बेच भी दिया गया है। हमारे सूत्रों ने हमको दो खरीदार के नाम भी बाताया है इनमे एक सपा नेता है जिन्होंने 20 लाख में एक दूकान खरीदा है और दूसरी एक विवादित महिला है जो बिहार की रहने वाली है, उसने 18 लाख में एक दुकान खरीदा है। अगर सिर्फ इन दो दुकानों के कीमत को ही देखे तो 38 लाख रूपया इस अवैध रूप से निर्मित हो रहे भवन से ही अब तक निर्माण में लगे हुवे सभी धन वसूल हो चुके है।
इस सम्बन्ध में वाराणसी विकास प्राधिकरण क्या कार्यवाई करता है यह अभी भविष्य के गर्भ में है। विकास प्राधिकरण के हमारे सूत्र बताते है कि कड़ी कार्यवाई इस ज़ोन के जोनल अधिकारी सौरभ कुमार द्वारा प्रस्तावित है। मगर स्थानीय जेई के द्वारा इस कार्यवाही पर कोई न कोई बड़ी अड़चन खडी किया जा रहा है, जिस कारण स्थानीय जेई की भूमिका को संदिग्ध दृष्टि से देखा जा सकता है। फिलहाल हमारे सूत्र बताते है कि रोज़ ही इस सील भवन के सील को तोड़ कर अवैध निर्माण जारी है। कभी कोई वीडीए के कर्मी आने होते है तो हमारे सूत्रों के अनुसार शाहिद मौलाना को पहले ही पता चल जाता है और टीम के आने से पहले ही वह अपने कारीगर और मजदूरों को किनारे कर देता है और कर्मचारियो के चले जाने पर दुबारा काम चालू देता है।










