मध्य प्रदेश: परीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने परीक्षार्थी की किया थप्पड़ो से पिटाई, बोले परीक्षा में नक़ल रोकने के लिए गया था

तारिक खान

डेस्क: मध्य प्रदेश के भिंड के जिला मजिस्ट्रेट संजीव श्रीवास्तव द्वारा परीक्षा के दौरान एक छात्र पर थप्पड़ बरसाने का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि ये वीडियो 1 अप्रैल के हैं जो अब वायरल हो गए हैं। वीडियो वायरल होने के बाद एक बार दुबारा आईएस अधिकारी संजीव श्रीवास्तव सुर्खियों में है। अक्सर विवादों में रहने वाले संजीव श्रीवास्तव के इस वायरल वीडियो पर अब तरह तरह के कमेन्ट आ रहे है।

ये पहली बार नहीं है जब कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव विवादों के कारण सुर्खियों में आए हैं। कुछ दिन पहले मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर पीठ ने लोक निर्माण विभाग से संबंधित एक मामले की सुनवाई करते हुए उनके आचरण पर टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि मुख्य सचिव को ये फैसला लेना चाहिए कि ऐसे अधिकारी (संजीव श्रीवास्तव जैसे) को फील्ड में रहना चाहिए या नहीं। हाल ही में भिंड में तैनात तहसीलदार माना शर्मा ने मजिस्ट्रेट संजीव श्रीवास्तव और गोहद एसडीएम पराग जैन पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र भी लिखा था।

NDTV की खबर के मुताबिक, घटना दीनदयाल डंगरौलिया महाविद्यालय में बीएससी सेकेंड ईयर की गणित की परीक्षा के दौरान की है। पहले वीडियो में, संजीव श्रीवास्तव को हाथ में एक कागज लिए देखा जा सकता है। उन्होंने परीक्षा कक्ष में छात्र को उसकी सीट से खींचकर बाहर निकाला और उसे जोर-जोर से थप्पड़ मारने लगे। वहीं दूसरे वीडियो में दिखता है कि छात्र को एक दूसरे कमरे में बैठाया गया था। मजिस्ट्रेट ने कमरे में मौजूद एक व्यक्ति को कागज थमाया और छात्र की ओर इशारा किया। इसके बाद वो उसकी ओर मुड़ते हैं और उसे कई बार थप्पड़ मारते हुए पूछते हैं, ‘तुम्हारा पेपर कहां है?’

छात्र की पहचान रोहित राठौर के रूप में हुई है। उसने बताया है कि पिटाई से उसके कान पर बुरा असर पड़ा है, लेकिन वो कुछ नहीं कर सका क्योंकि उसे पीटने वाला एक आईएएस अधिकारी है। जिला मजिस्ट्रेट संजीव श्रीवास्तव ने NDTV से बात करते हुए अपना बचाव किया है। उन्होंने कहा है कि उन्हें कॉलेज में बड़े पैमाने पर नकल की शिकायतें मिली थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ छात्र क्वेश्चन पेपर की तस्करी में शामिल थे और उन्हें पहले से हल करवाकर अदंर ले आए थे। मैं वहां एक संगठित नकल गिरोह की जांच करने गया था। मैंने विश्वविद्यालय को पत्र लिखकर ये सिफारिश भी की है कि भविष्य में उस कॉलेज को परीक्षा केंद्र के रूप में इस्तेमाल न किया जाए।

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