कई महीनों से बिजली नहीं थी, सीडीओ पहुंचे तो उजाले के साथ लौट आई उम्मीद, शिक्षक हुए भावुक, पॉलिथीन में बच्चे लाते थे किताबें, सीडीओ ने थमाया सपना सजाने वाला बैग

फारुख हुसैन
लखीमपुर खीरी। जिस कक्षा में कभी पसीने में भीगते बच्चों की खामोशी थी, वहां अब बिजली की रौशनी में गूंजती सीखने की आवाजें हैं। सीडीओ अभिषेक कुमार का एक निरीक्षण, एक फैसला और एक प्रतिबद्धता उच्च प्राथमिक विद्यालय सांडा को अंधेरे से निकालकर उम्मीदों के उजाले में ले आया। निरीक्षण के दौरान जब सामने आया कि विद्यालय में विद्युत कनेक्शन ही नहीं है, तो सीडीओ ने न कोई फाइल पलटी, न कोई रिपोर्ट मांगी। मौके पर ही आदेश हुआ विद्युत पोल लगेगा, वायरिंग होगी, और बच्चों को बिजली मिलेगी।

परिषदीय विद्यालय कुंवरपुर के निरीक्षण के दौरान सीडीओ अभिषेक कुमार ने जब बच्चों को पॉलिथीन में किताबें लाते देखा, तो यह दृश्य उन्हें विचलित कर गया। जांच में पाया कि डीबीटी से छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के खातों में बैग व स्टेशनरी की अनुमन्य धनराशि भेजी जा चुकी, बावजूद इसके बच्चों के पास जरूरी सामग्री का अभाव था। इस स्थिति को नजरअंदाज करने के बजाय सीडीओ ने मानवीय पहल की मिसाल पेश की। सीडीओ अभिषेक कुमार ने शुक्रवार को विद्यालय के सभी 30 बच्चों को स्वयं की ओर से स्कूल बैग और स्टेशनरी किट (पेंसिल, रबर, कटर, स्केल, ज्योमेट्री बॉक्स व वाटर कलर स्केच) प्रदान की। जैसे ही बच्चों के हाथों में बैग पहुंचे, चेहरे खुशी से खिल उठे, आंखों में चमक और पढ़ाई के प्रति नई उमंग दिखाई दी।










