खंडवा: पटाखा बाज़ार में बजरंग दल की ‘बारकोड जांच’ क्यों? त्यौहार पर क्यों उठी धर्म देखकर ख़रीददारी की मांग?

शफी उस्मानी

खंडवा (मध्य प्रदेश): देश में किसी भी त्यौहार के दौरान हिंदू संगठन सक्रिय हो जाते हैं और मुसलमानों के बहिष्कार का आह्वान करते हैं। 20 अक्टूबर को पूरे देश में दिवाली धूमधाम से मनाई जाएगी। लोग इस जश्न के लिए बड़ी मात्रा में पटाखे खरीद रहे हैं। इसी बीच, मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में हिंदू संगठन बजरंग दल ने दिवाली से पहले पटाखा बाज़ार में कई दुकानों पर मुसलमानों के बहिष्कार के लिए भगवा झंडे लगाए हैं।

दीपावली की जगमगाहट से ठीक पहले मध्य प्रदेश के खंडवा शहर के पटाखा बाज़ार में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में, बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का एक दल पटाखा दुकानों पर पहुंचा और उन्होंने दुकानों पर लगे बारकोड (Barcode) की जांच पड़ताल शुरू कर दी। इतना ही नहीं, कुछ दुकानों पर भगवा झंडे भी लगाए गए। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बजरंग दल के इस अचानक अभियान ने बाज़ार में तनाव पैदा कर दिया है। सवाल उठ रहा है कि आख़िर बजरंग दल क्यों बारकोड की जांच कर रहा था और इस पूरे मामले की वजह क्या है?

बजरंग दल के आरोपों का आधार क्या है?

बजरंग दल के इस हस्तक्षेप के पीछे एक गंभीर आरोप है, जिसने त्यौहार के माहौल को गरमा दिया है:

  • ‘नाम बदलकर दुकानदारी’ का आरोप: बजरंग दल का आरोप है कि पटाखा बाज़ार में अन्य धर्मों से जुड़े कुछ लोग हिन्दू नाम रखकर दुकानें चला रहे हैं। यह ‘नाम बदलकर’ व्यवसाय करने का आरोप ही विवाद की जड़ है।
  • भगवा झंडे की पहचान: कार्यकर्ताओं ने बाज़ार में कई दुकानों पर भगवा झंडे लगाए और घोषणा की कि ये झंडे ‘सनातन धर्म का पालन करने वाले’ दुकानदारों की पहचान के तौर पर लगाए जा रहे हैं।
  • धर्म देखकर ख़रीददारी की अपील: बजरंग दल के पदाधिकारियों ने खुले तौर पर लोगों से अपील की है कि दीपावली हिन्दू धर्म का पर्व है, इसलिए लोगों को अपना त्यौहार, अपने समाज के लोगों से ही ख़रीददारी करनी चाहिए।

संगठन का तर्क है कि बारकोड और अन्य दस्तावेज़ों की जांच से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि दुकानदार असली हैं या नहीं।

बाज़ार और प्रशासन पर असर

बजरंग दल के इस ‘अभियान’ के बाद पटाखा बाज़ार में सावधान और तनावपूर्ण माहौल बन गया है।

  • व्यापारियों में चिंता: जिन व्यापारियों पर आरोप लगाए गए हैं, वे स्वाभाविक रूप से चिंतित हैं क्योंकि त्यौहार के सीज़न में इस तरह का हस्तक्षेप उनके व्यवसाय पर सीधा असर डालेगा।
  • कानून-व्यवस्था का सवाल: हालांकि, ज़ी न्यूज़ की ख़बर के अनुसार, अभी तक प्रशासन ने इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन धार्मिक आधार पर ख़रीददारी की अपील और निजी जांच पड़ताल कानून-व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।

खंडवा में इससे पहले भी पटाखे जलाने को लेकर दो समुदायों में विवाद और पथराव की घटनाएँ हो चुकी हैं, ऐसे में प्रशासन को इस नए विवाद पर तुरंत संज्ञान लेना होगा ताकि त्यौहार का माहौल शांतिपूर्ण बना रहे।

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