सर्दी का आगमन होते ही दुधवा पहुंचने लगे प्रवासी परिंदे, मेहमान परिंदों के कलरव से गूंजे नदियां तालाब, झीलें और दलदली क्षेत्र

फारुख हुसैन
लखीमपुर खीरी: सर्दियों के आगमन के साथ ही भारत में हर साल हजारों प्रवासी पक्षी साइबेरिया यूरोप मध्य एशिया से लंबा सफर तय कर भारत पहुंचते हैं। अक्टूबर से मार्च तक देश की नदियां तालाब,झीलें और दलदली क्षेत्र इन मेहमान परिंदों के कलरव से गूंज उठते हैं। ठंडे प्रदेशों से आने वाले प्रवासी परिंदों की लगभग 370 प्रजातियां भारत पहुंचती हैं। इसी को लेकर उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तराई इलाके से सटा दुधवा टाइगर रिजर्व भी अब इन प्रवासी परिंदों की कलरव से गूंजने लगा है।


लेकिन शहरीकरण, प्रदूषण जलवायु परिवर्तन और क्रतिम रोशनी के कारण इनका अस्तित्व खतरे में है। पर्यावरण का भविष्य प्रवासी परिंदों के हाथों में है। यह हानिकारक कीटों की आबादी को नियंत्रित करने में भी सहयोग करते हैं और यह प्रवासी परिंदे न की सिर्फ सुंदरता के प्रतीक है बल्कि पारिस्थितिक तंत्र के रक्षक भी हैं बीजों के फैलाव से लेकर जंगलों का विकास और पौधों की विविधता के लिए भी हम इनको श्रेय दे सकते हैं और भारत में जो हजारों पर प्रवासी परिंदे आते हैं जो जैव विविधता को बनाने की अहम भूमिका निभाते हैं।










