बड़ा बवाल: LIC ने सरकारी दबाव में अडानी समूह में लगाए 32,000 करोड़? अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट पर LIC ने दिया रिपोर्ट पर जवाब

ईदुल अमीन

PNN24 न्यूज़, नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े सरकारी बीमा संस्थान भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को लेकर एक सनसनीखेज रिपोर्ट सामने आई है। अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ ने अपनी एक खोजी रिपोर्ट में दावा किया है कि LIC ने सरकारी अधिकारियों के प्रस्ताव पर चलते हुए अडानी समूह की कंपनियों में लगभग 3.9 अरब डॉलर (करीब 32,000 करोड़) का निवेश किया है। इस रिपोर्ट ने देश की आर्थिक और राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।

वॉशिंगटन पोस्ट का दावा: क्या है ‘सरकारी प्रस्ताव’?

‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ की रिपोर्ट आंतरिक दस्तावेजों और सरकारी अधिकारियों के साक्षात्कार पर आधारित है।

  • क्या था प्रस्ताव? रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मई 2025 में भारतीय वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने एक प्रस्ताव को हरी झंडी दी, जिसके तहत LIC के लगभग 9 अरब डॉलर के निवेश को अडानी समूह की कंपनियों में लगाया जाना था।
  • निवेश का रोडमैप: अखबार का आरोप है कि LIC को अडानी पोर्ट्स और अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के बॉन्ड्स में $3.4 बिलियन का निवेश करने और अन्य सहायक कंपनियों में इक्विटी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए “निर्देशित” किया गया था।
  • मकसद: रिपोर्ट के अनुसार, इस निवेश का उद्देश्य अडानी समूह को वित्तीय संकट से उबारने और बाजार में आत्मविश्वास का संकेत देना था, खासकर तब जब समूह वैश्विक आलोचना का सामना कर रहा था।

LIC ने दिया ‘जवाब’: दावे झूठे और निराधार

‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ की रिपोर्ट सामने आने के तुरंत बाद, LIC ने एक आधिकारिक बयान जारी किया और सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।

LIC का आधिकारिक बयान (मुख्य बातें):

  • “द वॉशिंगटन पोस्ट द्वारा लगाए गए आरोप कि LIC के निवेश निर्णयों को बाहरी कारकों से प्रभावित किया जाता है, झूठे, निराधार और सच्चाई से बहुत दूर हैं।”
  • “लेख में बताए गए किसी भी दस्तावेज़ या योजना को LIC द्वारा कभी तैयार नहीं किया गया, जो अडानी समूह की कंपनियों में फंड डालने का रोडमैप बनाता हो।”
  • “LIC के निवेश निर्णय स्वतंत्र रूप से और विस्तृत ड्यू डिलिजेंस (Due Diligence) के बाद बोर्ड-अनुमोदित नीतियों के अनुसार लिए जाते हैं। इन फैसलों में वित्तीय सेवा विभाग (DFS) या किसी अन्य सरकारी निकाय की कोई भूमिका नहीं होती है।”
  • LIC ने आगे कहा कि इस तरह के लेख LIC और भारत के मज़बूत वित्तीय क्षेत्र की छवि को धूमिल करने के इरादे से लिखे गए हैं।

राजनीतिक हलचल और अडानी समूह की प्रतिक्रिया

इस रिपोर्ट के बाद विपक्षी दल, खासकर कांग्रेस, केंद्र सरकार पर हमलावर हो गए हैं और 30 करोड़ पॉलिसी धारकों की बचत को खतरे में डालने का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने इस मामले की जांच संसद की लोक लेखा समिति (PAC) से कराने की मांग की है।

वहीं, अडानी समूह ने भी रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा है कि LIC कई कॉर्पोरेट समूहों में निवेश करती है और अडानी को विशेष तरजीह देने का सुझाव भ्रामक है। समूह ने कहा कि LIC ने उनके पोर्टफोलियो से अच्छा रिटर्न कमाया है और उनकी वृद्धि पीएम मोदी के राष्ट्रीय नेतृत्व से पहले की है।

आपका क्या मानना है? एक तरफ अमेरिकी अखबार का बड़ा दावा है, तो दूसरी तरफ LIC उसे पूरी तरह ख़ारिज कर रही है। देश का सबसे बड़ा बीमा संस्थान अपने पॉलिसी धारकों के हितों की रक्षा कैसे कर रहा है, यह सवाल अब सबकी जुबान पर है।

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