‘दित्वाह’ तूफ़ान का कहर: श्रीलंका में अब तक 56 लोगों की मौत, भारत ने तुरंत भेजी मदद

तारिक खान
PNN24 न्यूज़, कोलंबो/नई दिल्ली। हिंद महासागर में उठे चक्रवाती तूफ़ान ‘दित्वाह’ (Cyclone Ditwah) ने श्रीलंका में भीषण तबाही मचाई है। इस तूफ़ान और इसके साथ आई भारी बारिश और भूस्खलन के कारण अब तक 56 लोगों की दुखद मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। श्रीलंका इस प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है और ऐसे मुश्किल समय में भारत ने तुरंत मदद का हाथ बढ़ाया है।
श्रीलंका में तबाही का मंज़र
‘दित्वाह’ तूफ़ान ने श्रीलंका के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है।
- जनहानि: आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मरने वालों की संख्या 56 तक पहुँच गई है, और आशंका है कि यह आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है। हताहतों में अधिकांश मौतें भूस्खलन (Landslides) और पानी में डूबने (Drowning) के कारण हुई हैं।
- भूस्खलन का खतरा: भारी बारिश के कारण कई पहाड़ी और तटीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ है, जिसने कई घरों और इमारतों को जमींदोज कर दिया है। हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है।
- बुनियादी ढाँचे का नुकसान: तूफ़ान के कारण बिजली और संचार सेवाएँ बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। सड़कें और पुल बह गए हैं, जिससे राहत और बचाव कार्यों में भारी रुकावट आ रही है।
भारत बना ‘पहला मददगार’: तुरंत सहायता भेजी
श्रीलंका की इस मुश्किल घड़ी में, भारत ने अपने पड़ोसी धर्म का पालन करते हुए तुरंत राहत और बचाव सामग्री भेजी है।
- मानवीय सहायता: भारत सरकार ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमों और विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ जहाजों से बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री, दवाइयाँ, पेयजल और आपातकालीन उपकरण श्रीलंका भेजे हैं।
- राजनयिक सहयोग: भारतीय विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि वे लगातार श्रीलंका सरकार के साथ संपर्क में हैं और जरूरत के अनुसार अतिरिक्त सहायता भेजने के लिए तैयार हैं।
- क्षेत्रीय सहयोग: भारत का यह कदम क्षेत्रीय सहयोग और संकट की घड़ी में साथ खड़े रहने की नीति को मजबूत करता है।
बचाव और पुनर्वास कार्य जारी
श्रीलंका की सेना और आपदा प्रबंधन टीमें तेजी से बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं। प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश और बुनियादी सेवाओं को बहाल करने की है। दुनिया भर के देश इस प्राकृतिक आपदा पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं, लेकिन भारत की त्वरित प्रतिक्रिया ने श्रीलंका के लोगों के लिए बड़ी उम्मीद जगाई है।












