दालमंडी चौडीकरण पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने लिखा पीएम मोदी को पत्र, कहा ‘जब लहुराबीर-गोदौलिया और मैदागिन-विश्वनाथ मंदिर की 14 मीटर चौड़ी सड़क प्रस्तावित, तब केवल दालमंडी की सड़क 23 मीटर चौड़ी क्यों?’

निशा रोहतवी

वाराणसी: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने दालमंडी चौडीकरण मुद्दे पर अपनी मांगो के साथ साथ प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिख कर दालमंडी के दुकानदारों और स्थानीय निवासियों के तकलीफों को बयान किया है और मांग किया है कि भूमि अधिग्रहण एक्ट के तहत अगर चौडीकरण ज़रूरी है तो भूमि को अधिग्रहण किया जाए। पत्र में प्रदेश अध्यक्ष ने स्थानीय प्रशासन की एकतरफा कार्यवाई के तरफ भी ध्यानाकर्षण करवाया है। साथ ही इस मुद्दे को भी उठाया है कि शहर में सभी सड़के 14 मीटर चौड़ी प्रस्तावित है, तो फिर दालमंडी की गली 23 मीटर चौड़ी क्यों हो रही है?

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने पत्र में लिखा है कि ‘माननीय प्रधानमंत्री जी आप अवश्य अवगत होंगे काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के हिस्से के रूप में 8 फीट की सकरी गलियों को 23 फीट तक चौड़ा करने की योजना के कारण वाराणसी स्थित दालमंडी जैसे व्यवसायिक क्षेत्र में स्थानीय निवासियों के विस्थापन का खतरा हो रहा है। इस योजना से हजारों दुकानदारों और निवासी प्रभावित हो रहे है। हालांकि प्राप्त जानकारी के अनुसार इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने में 2025 में इस पर तोड़फोड़ पर रोक लगा दी है। परंतु स्थानीय प्रशासन की एकतरफा कार्रवाई से इलाके में तनाव का माहौल है।’

अजय राय ने पत्र में लिखा है कि ‘स्थानीय व्यापार संगठन, नागरिक इस कार्रवाई का विरोध कर रहे है। उल्लेखनीय की 25 वर्ष पुराने मामले के आधार पर वाराणसी विकास प्राधिकरण ने यहां के दुकानदारों निवासियों किराएदारों को नोटिस थमा दी है। जहां एक तरफ सरकार इसे शहर के चौड़ीकरण के लिए जरूरी बात रही है, वहीं दूसरी ओर व्यापारी अपने रोजगार और अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे है। इसलिए शहर वासियों के लिए यह मुद्दा अब विकास बनाम विस्थापन की बहस में बदल गया है। इस विस्थापन की प्रक्रिया में वाराणसी विकास प्राधिकरण, लोक निर्माण विभाग, विद्युत विभाग इत्यादि विभग भी सम्मिलित है।’

पत्र में लिखा है कि ‘यह भी प्रश्न है कि जब लहुराबीर से गोदौलिया और मैदागिन से विश्वनाथ मंदिर की 14 मीटर चौड़ी सड़क प्रस्तावित है, तब केवल दालमंडी की सड़क 23 मीटर चौड़ा करना कहां तक उचित होगा ? क्या यह उचित नहीं होगा कि जिलाधिकारी के समस्त प्रस्तुत किए जाने वाले अधिग्रहण संबंधी शपथ पत्र को वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के रूप में मान्यता देते हुए उनके प्रावधानों के अंतर्गत मुआवजा का भी भुगतान किया जाए ? वाराणसी आपका संसदीय क्षेत्र है अतः उचित होगा कि यदि विस्थापन आवश्यक हो तब भी विस्थापितों को आज के बाजार भाव पर मुआवजा दिया, ताकि आर्थिक कठिनाइयों के दौर में उनको कुछ राहत मिल सके। इसके अतिरिक्त विस्थापित किए जाने वाले दुकानदारों को किसी अन्य स्थान पर दुकानें आवंटित की जाए, ताकि उसकी जीविका चल सके।’

पत्र में अजय राय ने लिखा है कि ‘अधोहस्ताक्षरी ने स्वयं इस क्षेत्र का व्यक्तिगत रूप से दौरा करके यहां के निवासियों की व्यथा संज्ञान लिया है। आशा है कि उपरोक्त विषय पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान देते हुए आप स्थानीय प्रशासन को अवैध विस्थापन की प्रक्रिया रोकने का आदेश जारी करेंगे। अन्यथा सभी विस्थापित किए गए नागरिक दुकानदार भवन स्वामियों किराएदारों को वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत मिलने वाले सभी लाभ तथा व्यापारियों को नियत दुकान आवंटित करने का आदेश देने का निर्देश जारी करेंगे। दालमंडी वाराणसी के सभी निवासियों के प्रति आपकी सकारात्मक निर्देश के लिए आपका आभार होगा।’

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