‘बहुविवाह ने मुस्लिम महिलाओं से छीना जीने का हक़…!’ असम के CM हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा बयान

आदिल अहमद
PNN24 न्यूज़, गुवाहाटी (असम)। असम के मुख्यमंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता हिमंत बिस्वा सरमा ने एक बार फिर ‘बहुविवाह’ (Polygamy) के मुद्दे पर मुस्लिम समाज को लेकर एक बड़ा और सीधा बयान दिया है। मुख्यमंत्री सरमा ने दावा किया है कि बहुविवाह की प्रथा ने मुस्लिम महिलाओं से उनका ‘ज़िंदा रहने का बुनियादी हक़’ (Fundamental Right to Live) छीन लिया है। उनका यह बयान असम सरकार द्वारा बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में उठाए गए कदमों के बीच आया है, जिसने देश भर में एक नई बहस छेड़ दी है।
क्या है हिमंत बिस्वा सरमा का आरोप?
मुख्यमंत्री सरमा ने अपने बयान में बहुविवाह को महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन बताया।
- बुनियादी हक़ पर हमला: सरमा ने कहा, “बहुविवाह प्रथा महिलाओं को सिर्फ सामाजिक और आर्थिक रूप से ही कमज़ोर नहीं करती, बल्कि यह उनके जीने के बुनियादी हक़ पर सीधा हमला है।” उन्होंने तर्क दिया कि एक ही व्यक्ति की कई पत्नियाँ होने से महिलाएँ अक्सर उपेक्षा, गरीबी और मानसिक उत्पीड़न का शिकार होती हैं, जो उनके गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का हनन है।
- सामाजिक बुराई: उन्होंने बहुविवाह को एक सामाजिक बुराई बताया, जिसे धार्मिक आस्था की आड़ में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
- समान नागरिक संहिता (UCC) पर ज़ोर: उन्होंने एक बार फिर संकेत दिया कि बहुविवाह को खत्म करने के लिए उनकी सरकार समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) या उससे मिलते-जुलते कानून को असम में लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।
मुस्लिम महिलाओं के लिए न्याय की लड़ाई
हिमंत बिस्वा सरमा का कहना है कि उनकी सरकार का यह कदम किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने की दिशा में उठाया गया है।
- पीड़ित महिलाओं का दर्द: उन्होंने दावा किया कि असम में ऐसी हजारों मुस्लिम महिलाएँ हैं जो बहुविवाह के कारण दर्द और मुश्किलों का सामना कर रही हैं, और सरकार उन्हें इस बंधनों से आज़ादी दिलाना चाहती है।
- संवैधानिक दायित्व: सरमा ने कहा कि सरकार का संवैधानिक दायित्व है कि वह सभी नागरिकों, विशेषकर महिलाओं, के अधिकारों की रक्षा करे, भले ही वे किसी भी धर्म या समुदाय से हों।
सियासी और धार्मिक प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री सरमा के इस बयान पर राजनीतिक और धार्मिक दोनों ही क्षेत्रों से तीखी प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं।
- विपक्ष का आरोप: विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सरमा धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति कर रहे हैं और यह बयान मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने के लिए दिया गया है।
- समर्थन: वहीं, कई मुस्लिम महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने सरमा के इस रुख का समर्थन किया है और कहा है कि बहुविवाह वास्तव में महिलाओं के जीवन को मुश्किल बनाता है।
फिलहाल, असम सरकार इस विवादास्पद कानून को लाने की पूरी तैयारी में है, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या सामाजिक सुधार के लिए धार्मिक व्यक्तिगत कानूनों में हस्तक्षेप ज़रूरी है।












