नेशनल हेराल्ड केस में बड़ा बवाल! सोनिया-राहुल गांधी के ख़िलाफ़ FIR दर्ज, जयराम रमेश बोले- ‘प्रतिशोध की राजनीति’

मो0 कुमेल
PNN24 न्यूज़, नई दिल्ली। देश की राजनीति में एक बार फिर नेशनल हेराल्ड (National Herald) मामले को लेकर बड़ा सियासी तूफान खड़ा हो गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस के शीर्ष नेताओं, सोनिया गांधी और राहुल गांधी, सहित कई अन्य लोगों के ख़िलाफ़ एफआईआर (FIR) दर्ज की है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार पर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगा रही है।
क्या है ED की शिकायत और आरोप?
पीटीआई समाचार एजेंसी के अनुसार, दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (Economic Offences Wing – EOW) ने 3 अक्टूबर को गांधी परिवार और सात अन्य के ख़िलाफ़ यह शिकायत दर्ज की थी।
- मनी लॉन्ड्रिंग का हिस्सा: यह एफआईआर मनी लॉन्ड्रिंग मामले की चल रही जाँच का हिस्सा है।
- आरोप: इस हाई प्रोफ़ाइल केस में गांधी परिवार पर निजी लाभ के लिए अपने पद के दुरुपयोग का गंभीर आरोप है। मामला यंग इंडियन (YI) और एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) से जुड़ी संपत्तियों के लेनदेन से संबंधित है।
- FIR में कौन-कौन शामिल? एफआईआर में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस नेता सुमन दुबे और सैम पित्रोदा, यंग इंडियन और डोटेक्स मर्चेंडाइज़ लिमिटेड जैसी संस्थाओं, डोटेक्स प्रमोटर सुनील भंडारी, एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) और अन्य अज्ञात लोगों के नाम शामिल हैं।
कांग्रेस का पलटवार: ‘झूठा और बेबुनियाद मामला’
एफआईआर दर्ज होने की खबर आते ही कांग्रेस ने केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के संचार प्रमुख जयराम रमेश ने इस पूरी कार्रवाई को झूठा और प्रतिशोध पर आधारित बताया है।
- ‘प्रतिशोध की राजनीति‘: जयराम रमेश ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, “मोदी-शाह की जोड़ी कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के ख़िलाफ़ लगातार डराने-धमकाने और प्रतिशोध की राजनीति कर रही है। नेशनल हेराल्ड मामला पूरी तरह से झूठा और निराधार है।”
- डर का माहौल: कांग्रेस का कहना है कि यह एफआईआर केंद्र सरकार द्वारा विपक्ष के नेताओं को डराने और चुप कराने की कोशिश है, ताकि वे जनता के मुद्दों को उठाना बंद कर दें।
यह कानूनी कार्रवाई अब निश्चित रूप से संसद से लेकर सड़क तक राजनीतिक तापमान को बढ़ाएगी। देखना यह होगा कि दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा इस हाई-प्रोफाइल मामले में आगे क्या कदम उठाती है।










