पाकिस्तान का बड़ा ऐलान….! ग़ज़ा में शांति सेना (ISF) भेजने को तैयार, पर हमास को निरस्त्र करने में नहीं होंगे शामिल

फारुख हुसैन
PNN24 न्यूज़ डेस्क: पाकिस्तान ने ग़ज़ा (Gaza) पट्टी में शांति स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बयान दिया है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इसहाक़ डार ने घोषणा की है कि उनका देश इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फ़ोर्स (ISF) में भाग लेने के लिए तैयार है और अपने सैनिकों को ग़ज़ा में भेजने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, उन्होंने एक अहम शर्त रखी है: पाकिस्तान हमास को निरस्त्र (Disarm) करने के काम में शामिल नहीं होगा।
‘शांति स्थापित करने के लिए हम तैयार हैं’
समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस ऑफ़ पाकिस्तान (एपीपी) के अनुसार, मोहम्मद इसहाक़ डार ने इस्लामाबाद में एक संवाददाता सम्मेलन में पाकिस्तान का रुख स्पष्ट किया।
- सैनिक भेजने को तैयार: विदेश मंत्री डार ने कहा कि पाकिस्तान ग़ज़ा शांति सेना में अपना योगदान देने और अपने सैनिकों को तैनात करने के लिए तैयार है।
- हमास को निरस्त्र करने से इनकार: उन्होंने स्पष्ट किया कि अन्य प्रमुख देशों की तरह, पाकिस्तान भी ग़ज़ा में हमास को निरस्त्र करने (Disarming Hamas) के काम में शामिल नहीं होगा। यह रुख इजरायल और हमास के बीच चल रहे संघर्ष में पाकिस्तान की तटस्थता की जटिल स्थिति को दर्शाता है।
UNSC की मंज़ूरी और स्पष्ट नियम अनिवार्य
पाकिस्तान ने ग़ज़ा में शांति सैनिकों की तैनाती को लेकर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सामने अपनी प्रमुख शर्तें रखी हैं।
- सुरक्षा परिषद की मंज़ूरी: इसहाक़ डार ने साफ कर दिया कि ग़ज़ा में शांति सैनिकों को तैनात करने की योजना को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की मंजूरी लेनी होगी।
- नियम और भूमिका स्पष्ट हो: उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपना योगदान देने के लिए तैयार है, लेकिन इससे पहले ISF के नियम और शर्तें, जनादेश (Mandate) और भूमिका का स्पष्ट रूप से निर्णय होना चाहिए।
- अंतिम निर्णय लंबित: विदेश मंत्री का कहना है कि जब तक ये कारक तय नहीं हो जाते, पाकिस्तान इस संबंध में कोई आख़िरी निर्णय नहीं ले सकता।
पाकिस्तान का यह बयान फिलिस्तीन और इजरायल संघर्ष के बीच शांति प्रयासों में मुस्लिम राष्ट्रों की भूमिका को और महत्वपूर्ण बना सकता है। अब देखना यह होगा कि प्रस्तावित इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फ़ोर्स की रूपरेखा क्या बनती है और UNSC इस संबंध में क्या फैसला लेता है।










