राहुल गांधी के ख़िलाफ़ सावरकर मानहानि केस में बड़ा ‘ट्विस्ट’…! सीडी चली ही नहीं, कोर्ट में सब हैरान

तारिक खान
PNN24 न्यूज़ डेस्क: कांग्रेस नेता और सांसद राहुल गांधी के ख़िलाफ़ हिंदुत्ववादी विचारक विनायक दामोदर सावरकर पर कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में चल रहे केस में पुणे की एमपी-एमएलए कोर्ट में एक अविश्वसनीय और बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। जिस सीडी (CD) में रिकॉर्ड भाषण के आधार पर यह केस शुरू हुआ था और राहुल गांधी को समन भेजा गया था, गवाही के दौरान उसे चलाए जाने पर वह पूरी तरह ब्लैंक निकली! इस घटना ने कोर्ट रूम में मौजूद सभी लोगों, यहाँ तक कि शिकायतकर्ता के वकील को भी हैरान कर दिया।
सीडी में कोई कंटेंट नहीं, जज भी चौंके
पुणे के एमपी-एमएलए कोर्ट में मजिस्ट्रेट अमोल शिंदे इस मामले की सुनवाई कर रहे थे। सावरकर के परपोते सत्यकी सावरकर ने राहुल गांधी के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्होंने लंदन में एक भाषण दिया था, जिसमें विनायक दामोदर सावरकर के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक बातें कही गई थीं।
- गवाही में घटना: गुरुवार, 27 नवंबर को जब शिकायतकर्ता सत्यकी सावरकर की गवाही चल रही थी, तभी वह विवादास्पद सीडी फिर से खोली गई।
- बड़ा ट्विस्ट: जैसे ही सीडी को चलाया गया, स्क्रीन पर कुछ नहीं आया। सीडी पूरी तरह खाली थी और उसमें कोई डेटा ही नहीं था। जज और वकील इंतजार करते रहे, लेकिन सीडी में कोई कंटेंट नहीं चला।
- वकील हैरान: सत्यकी की ओर से दलीलें पेश कर रहे एडवोकेट संग्राम कोल्हटकर यह देखकर चौंक गए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि इसी सीडी को पहले कोर्ट में चलाया जा चुका है और इसी के आधार पर यह केस शुरू हुआ था।
‘यूट्यूब’ भी नहीं चला, सबूत पर उठा सवाल
सीडी खाली मिलने के बाद, शिकायतकर्ता के वकील कोल्हटकर ने कोर्ट से एक और रास्ता अपनाने का अनुरोध किया।
- यूट्यूब का प्रस्ताव: कोल्हटकर ने कोर्ट से कहा कि राहुल गांधी का वो विवादित भाषण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यूट्यूब (YouTube) पर मौजूद है और इसे वहीं से सीधे देखा लिया जाए। उन्होंने कोर्ट को वीडियो का लिंक भी दिया।
- राहुल के वकील का विरोध: राहुल गांधी की ओर से पेश हुए वकील मिलिंद पवार ने इसका कड़ा विरोध किया। उन्होंने कोर्ट से कहा कि ऑनलाइन वीडियो अपने आप में सबूत नहीं माना जा सकता।
मजिस्ट्रेट शिंदे को यह बात सही लगी। उन्होंने पवार की बात मानते हुए कोल्हटकर से कहा कि इंडियन एविडेंस एक्ट (Indian Evidence Act) की धारा 65B के मुताबिक (यूट्यूब) URL सर्टिफिकेट से सपोर्टेड नहीं है, इसलिए इसे सबूत नहीं माना जा सकता।
क्या कहता है इंडियन एविडेंस एक्ट?
इंडियन एविडेंस एक्ट की धारा 65B के अनुसार:
अगर कोई इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जैसे- मोबाइल, कंप्यूटर, सीसीटीवी, ईमेल या वीडियो को कोर्ट में सबूत के रूप में इस्तेमाल करना है, तो उसके साथ एक खास सर्टिफिकेट देना ज़रूरी होता है। यह सर्टिफिकेट यह साबित करता है कि डेटा असली है, सही तरीके से बने डिवाइस से लिया गया है और इसमें कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है।
इसके बाद, कोल्हटकर ने 2 और सीडी कोर्ट में पेश कीं, लेकिन पवार के विरोध और कानूनी बाध्यताओं के चलते मजिस्ट्रेट ने उनकी अपील खारिज कर दी। कोल्हटकर ने अब कोर्ट से न्यायिक जांच की मांग की है ताकि यह पता चल सके कि पहले ठीक चल रही सीडी अचानक खाली कैसे हो गई? कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख शुक्रवार 5 नवंबर तय की है। यह केस अब सावरकर-राहुल विवाद से हटकर इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की विश्वसनीयता के एक बड़े सवाल में उलझ गया है।












