बंगाल में बड़ा आरोप….! TMC प्रतिनिधिमंडल ने CEC ज्ञानेश कुमार से कहा- ‘आपके हाथ खून से सने हैं’

आदिल अहमद
PNN24 न्यूज़, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के बीच सीधा टकराव सामने आया है। शुक्रवार (28 नवंबर) को TMC के एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में CEC ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की और उन पर बेहद गंभीर और भावनात्मक आरोप लगाया कि उनके ‘हाथ खून से सने‘ हैं।

40 मौतों की सूची सौंपी: ‘SIR बनी मौत का कारण’
TMC प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव आयुक्त को एक सूची सौंपी है, जिसमें उन 40 लोगों के नाम शामिल हैं जिनकी कथित तौर पर SIR की प्रक्रिया के दौरान मौत हुई है।
- TMC का दावा: पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या सुधारने की लंबी और जटिल प्रक्रिया, खासकर बुजुर्गों और वंचित वर्गों के लिए, इतनी तनावपूर्ण और थकाने वाली रही है कि इसके परिणामस्वरूप लोगों की जान चली गई है।
- सीधा हमला: इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, TMC सांसद डेरेक ओब्रायन ने कहा, “हमने मीटिंग यह कहकर शुरू की कि मुख्य चुनाव आयुक्त के हाथ खून से सने हैं।” यह बयान इस बात को दर्शाता है कि TMC इस मामले को कितनी गंभीरता और आक्रामकता से ले रही है।
CEC से पूछे गए पाँच तीखे सवाल
डेरेक ओब्रायन ने बताया कि मुलाकात के दौरान उनके साथ कल्याण बनर्जी, महुआ मोइत्रा और ममता बाला ठाकुर भी मौजूद थीं। इन नेताओं ने लगभग 40 मिनट तक अपनी बात रखी और चुनाव आयोग से पाँच महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे।
- पारदर्शिता पर सवाल: TMC मुख्य रूप से इस SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता, समय-सीमा और इसके मानवीय पहलुओं को लेकर सवाल उठा रही है।
- मानवीय संवेदना की कमी: प्रतिनिधिमंडल का मुख्य मुद्दा यह था कि चुनाव आयोग ने यह प्रक्रिया शुरू करते समय मानवीय संवेदना और जमीनी हकीकत को नज़रअंदाज़ किया, जिससे यह एक त्रासदी बन गई।
चुनाव आयोग पर दबाव
TMC के इस सीधे और बेहद कड़े आरोप ने चुनाव आयोग पर भारी दबाव बना दिया है। आमतौर पर, राजनीतिक दल नीतियों पर सवाल उठाते हैं, लेकिन सीधे CEC पर खून से सने हाथ होने का आरोप लगाना एक अभूतपूर्व घटना है।
अब सबकी निगाहें चुनाव आयोग पर टिकी हैं कि वह TMC द्वारा सौंपे गए 40 मौतों की सूची और गंभीर आरोपों पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है और क्या वह SIR प्रक्रिया में मानवीय आधार पर कोई बदलाव करता है। बंगाल की राजनीति में इस आरोप-प्रत्यारोप ने एक बार फिर केंद्र और राज्य के बीच टकराव को बढ़ा दिया है।











