सोलर किड्स’ की रहस्यमय बीमारी: 9 साल से रात में बेबस हैं ये तीन भाई, दुनिया की पहली अनोखी बीमारी…!

निलोफर बानो
PNN24 न्यूज़ डेस्क: लगभग नौ साल पहले, पाकिस्तानी मीडिया में एक असामान्य और अचंभित कर देने वाली मेडिकल कंडीशन की ख़बरें सुर्खियों में आई थीं, जिसने न केवल पाकिस्तान, बल्कि पूरी दुनिया के मेडिकल साइंस का ध्यान खींच लिया था। यह कहानी बलूचिस्तान के उन तीन भाइयों की थी, जिनके बारे में दावा किया गया था कि वे ‘सूरज की रोशनी पर चलते हैं’। और यह दावा सच के काफी करीब था।
रात होते ही ‘थम’ जाती थी ज़िंदगी
ये तीनों भाई दिन के समय तो आम बच्चों की तरह हंसते-खेलते और अपनी ज़िंदगी जीते थे, लेकिन जैसे ही सूरज डूबता, उनकी ज़िंदगी मानो ठहर सी जाती थी।
- सूरज से कनेक्शन: मीडिया में इन भाइयों के बारे में दावा किया गया था कि वह दोनों “सूरज के साथ उगते हैं और सूरज के साथ ही डूब जाते हैं।”
- बेबसी की रात: शाम होते ही वे बेबस और लकवाग्रस्त जैसी स्थिति में पड़े रहते थे। उन्हें अगले दिन सूरज निकलने के बाद ही होश आता था।
- रात क्या है, नहीं जानते थे: नौ साल पहले तक, इन भाइयों को यह पता ही नहीं था कि रात कैसी होती है, वह कब आती है और उस दौरान उनकी ज़िंदगी कैसी होती है, क्योंकि उन्हें अगली सुबह सूरज निकलने के बाद ही होश आता था।

दुनिया की पहली अनोखी बीमारी
इस असाधारण केस की जांच के लिए पाकिस्तान और विदेशों में भी गहन मेडिकल टेस्ट की एक पेचीदा प्रक्रिया शुरू हुई।
- बीमारी की पहचान: इन गहन जांचों के बाद दावा किया गया कि ये तीनों भाई “दुनिया में अब तक पाई गई अपनी तरह की पहली बीमारी” से पीड़ित हैं। हालांकि, मेडिकल एक्सपर्ट्स ने अभी तक इस बीमारी का सटीक नाम सार्वजनिक नहीं किया है।
- प्रोफ़ेसर जावेद अकरम का बयान: इन बच्चों के इलाज से जुड़े पाकिस्तान के डॉक्टर प्रोफ़ेसर जावेद अकरम (जो सन 2016 से इस मामले से जुड़े हैं) कहते हैं कि इस बीमारी पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े पैमाने पर टेस्ट्स हुए हैं, और वे अब भी जारी हैं।
इलाज से मिली थोड़ी राहत, मुश्किलें अब भी हैं
बीमारी की पहचान के बाद, इन बच्चों को एक विशेष दवा दी गई। इस दवा की बदौलत ही इन ‘सोलर किड्स’ को थोड़ी राहत मिली।
- आंशिक सुधार: पिछले नौ साल से, ये तीनों भाई रात में भी कुछ हद तक सामान्य ज़िंदगी जीने के काबिल तो हो गए हैं।
- मुश्किलें बरकरार: लेकिन उनकी मुश्किलें न सिर्फ़ बरक़रार हैं, बल्कि समय के साथ बढ़ती जा रही हैं।
- गरीबी और भविष्य की फ़िक्र: क्वेटा में रहने वाले इन बच्चों के माता-पिता अपनी गरीबी की वजह से उनके इलाज में भारी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। उन्हें अपने बच्चों के भविष्य को लेकर भी गहरी फ़िक्र है।
पढ़ाई छूटी, रात ने छीनी ज़िंदगी! ‘सोलर किड्स’ की दर्दभरी कहानी, परिवार और बचपन सब अंधेरे में
दुनिया भर में अपनी रहस्यमय बीमारी के कारण सुर्खियों में आए ‘सोलर किड्स‘ की ज़िंदगी की कहानी केवल मेडिकल साइंस की एक पहेली नहीं है, बल्कि गरीबी, लाचारी और टूटे सपनों की एक दर्द भरी दास्तान भी है। ये बच्चे क्वेटा के पास मियां ग़ंडी इलाके के रहने वाले मोहम्मद हाशिम के बेटे हैं। हाशिम के कुल नौ बच्चों में से पाँच इसी अजीब बीमारी से पीड़ित थे, जिनमें से दो तो इसी बीमारी की वजह से असमय दुनिया को अलविदा कह गए।
दो चले गए, तीन जूझ रहे…
मोहम्मद हाशिम के दिल का दर्द उनकी बातों में साफ झलकता है। उन्होंने बताया कि अब उनके तीन बेटे इस अजीबोगरीब ज़िंदगी से जूझ रहे हैं:
- शोएब अहमद: सबसे बड़े भाई, जिनकी उम्र 19 साल है और अब जवान हो चुके हैं।
- रशीद अहमद: उनसे छोटे भाई, जिनकी उम्र लगभग 17 साल है और अब ये भी जवान हो रहे हैं।
- मोहम्मद इलियास: सबसे छोटे भाई, जिनकी उम्र अभी कम है और जिन्हें रात के अँधेरे में बेबसी का सामना करना पड़ता है।
मदरसे से भी लौटना पड़ा: पढ़ाई का सपना टूटा
इन बच्चों के लिए सामान्य बचपन जीना तो दूर, शिक्षा हासिल करना भी एक संघर्ष बन गया।
- दाख़िला, पर पढ़ाई नहीं: शोएब और रशीद, दोनों बड़े भाइयों को बचपन में हज़ारगंजी में स्थित एक मदरसे में दाख़िल कराया गया था।
- बीमारी बनी बाधा: उनके चाचा शब्बीर अहमद ने बताया कि जिस तरह की असामान्य बीमारी इन बच्चों को थी, उसकी वजह से मदरसे के कर्ता-धर्ता के लिए उन्हें संभालना मुश्किल हो गया। हर रात को बेबस हो जाने वाले बच्चों को देखकर घरवाले भी हर वक़्त परेशान रहते थे।
- शिक्षा से वंचित: इस हालत की वजह से वे मदरसे में अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख सके और इस अनोखी मारी ने उन्हें किसी स्कूल में भी पढ़ने नहीं दिया।
रात के अँधेरे में डूबा बचपन
यह त्रासदी सिर्फ इन भाइयों की शारीरिक समस्या नहीं है, बल्कि उन बचपन के सपनों का टूटना है, जो रात के अँधेरे में दम तोड़ देते हैं। दुनिया भर में ‘सोलर किड्स‘ नाम से मशहूर हुए ये बच्चे आज भी गरीबी से जूझते हुए अपने बेहतर इलाज और सामान्य भविष्य की आस लगाए बैठे हैं। उनके चाचा शब्बीर अहमद की बातों से स्पष्ट है कि यह बीमारी इन परिवारों के लिए एक असहनीय बोझ बन चुकी है, जहाँ शिक्षा और जीविकोपार्जन दोनों मुश्किल हैं। आज जब सरकार ने मदद का आश्वासन दिया है, तो उम्मीद है कि इन बच्चों को सही इलाज मिलेगा, ताकि इनका भविष्य फिर से सूरज की रोशनी की तरह उज्जवल हो सके।
बलूचिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री बख़्त मोहम्मद काकड़ ने आश्वासन दिया है कि राज्य सरकार इन बच्चों के इलाज के लिए हर संभव सुविधाएं मुहैया कराएगी। तो आखिर इन बच्चों को कौन-सी बीमारी है और अब उनका क्या इलाज चल रहा है? इसकी चर्चा बाद में, पहले उन बच्चों को होने वाली परेशानियों को जान लेते हैं।












