बड़ा फैसला: अब UP में ‘जन्म तिथि’ के लिए आधार कार्ड वैध नहीं….!

निशा
PNN24 न्यूज़, लखनऊ (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के निवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण और बड़ा बदलाव सामने आया है! प्रदेश की नियोजन विभाग (Planning Department) ने सभी सरकारी विभागों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि अब से किसी भी सरकारी प्रक्रिया में जन्म तिथि (Date of Birth) के प्रमाण के रूप में आधार कार्ड (Aadhaar Card) को वैध दस्तावेज़ (Valid Document) नहीं माना जाएगा। इस फैसले का सीधा असर प्रदेश में निकलने वाली सरकारी नौकरियों, शैक्षणिक प्रवेश और विभिन्न सरकारी योजनाओं पर पड़ना तय है।
क्या है नियोजन विभाग का नया निर्देश?
यह निर्देश केंद्र सरकार और यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) की पहले की सलाहों के अनुरूप है, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे कठोरता से लागू करने का फैसला किया है।
- अवैध घोषित: अब किसी भी आवेदन या वेरिफिकेशन प्रक्रिया में, जहाँ जन्म तिथि साबित करने की आवश्यकता होगी, वहाँ आधार कार्ड का उपयोग नहीं किया जा सकेगा।
- कारण: UIDAI ने स्वयं स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड मुख्य रूप से पहचान (Identity) का प्रमाण है, न कि जन्म तिथि या निवास का। आधार में दर्ज जन्म तिथि केवल प्रमाणित (Verified) होती है, जबकि अन्य दस्तावेजों (जैसे पासपोर्ट या पैन कार्ड) में यह घोषित (Declared) हो सकती है।
- भविष्य की प्रक्रिया: सभी सरकारी विभागों को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि वे आवेदक से जन्म तिथि साबित करने के लिए अन्य प्रामाणिक दस्तावेज़ों (जैसे बर्थ सर्टिफिकेट, हाई स्कूल/इंटरमीडिएट की मार्कशीट, पासपोर्ट, आदि) की ही मांग करें।
आम जनता पर क्या होगा असर?
यह फैसला उन लाखों लोगों को प्रभावित करेगा जो अब तक सहजता के लिए हर जगह आधार कार्ड का इस्तेमाल करते थे।
- नौकरियाँ और प्रवेश: सरकारी नौकरियों के फॉर्म भरते समय या शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश लेते समय अब केवल आधार कार्ड दिखाने से काम नहीं चलेगा।
- योजनाओं में जटिलता: विभिन्न सरकारी योजनाओं (जैसे पेंशन, छात्रवृत्ति) में भी जन्म तिथि के सत्यापन के लिए अन्य दस्तावेज़ों की मांग की जाएगी, जिससे प्रक्रिया थोड़ी जटिल हो सकती है।
- जागरूकता की ज़रूरत: जनता को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके पास जन्म प्रमाण पत्र या स्कूल की मार्कशीट जैसे अन्य प्रामाणिक दस्तावेज़ तैयार रहें।
क्यों लिया गया यह फैसला?
जानकारों का मानना है कि यह कदम जन्म तिथि से जुड़ी धोखाधड़ी (Fraud) और अवैध लाभ लेने की कोशिशों पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया है। कई मामलों में आधार कार्ड में जन्म तिथि को आसानी से बदलवा लिया जाता था, जिसका उपयोग बाद में आयु सीमा से संबंधित लाभ लेने के लिए किया जाता था। उत्तर प्रदेश सरकार का यह निर्देश साफ संकेत देता है कि अब प्रामाणिक जन्म प्रमाण पत्र की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।












