गजब वीडीए के वीसी साहब, आपने तो इतिहास बना डाला: भवन संख्या सी0 1/24 का जी+4 का डीओ नोटिस 2003 का पास चिपका दिया, जबकि भवन मौके पर जी+2 ही है, कही जादुई भवन तो नहीं है?

तारिक आज़मी

वाराणसी: वाराणसी के दालमंडी मार्ग के चौडीकरण को लेकर चल रही प्रशासनिक कवायद अपने चरम पर पहुच चुकी है। न खाता न बही, सरकारी विभाग कह दे बस वही सही। किसी तरह से इस इलाके के निवासियों और दुकानदारों को परेशान किया जाए इसके लिए सभी विभाग ने ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ के तर्ज पर एक दुसरे से सुर में सुर मिलाना शुरू कर दिया। अपने कुर्सी पर बैठे बैठे सपनो सरीखे आदेशो को सड़क पर चस्पा कर खुद अब वाराणसी विकास प्राधिकरण हसी का पात्र बन बैठा है।

नई सड़क स्थित भवन संख्या सी0 1/24 जिसके भू स्वामी मुख़्तार उर्फ़ नाटे पप्पू है के भवन को तोड़ने के लिए वाराणसी विकास प्राधिकरण कल शाम से ही समस्त कवायद कर रहा है। पहले कल शाम को बुल्डोज़र लेकर पहुचे विभाग को जब हाई कोर्ट के आदेश से मुह की खाना पड़ा तो आनन् फानन में वाराणसी विकास प्राधिकरण समस्त मेहनत पर अपने पुचारे फेरने के लिए खड़ा हो गया। इस कवायद में वाराणसी विकास प्राधिकरण के वीसी साहब ने एक कथित आदेश वर्ष 2003 का ध्वस्तीकरण का भवन पर चस्पा कर दिया साथ में तोड़ने का नोटिस भी वर्ष 2003 का चस्पा कर डाला।

महज़ 100 वर्गफिट की जगह पर बने इस भवन को आप जादुई भवन भी कह सकते है। इसका जादू ये है कि वाराणसी विकास प्राधिकरण को अपने कागजों में यह भवन जी+4 दिखाई दे रहा है। जबकि मौके पर पूरी दुनिया को यह भवन जी+2 ही दिखाई दे रहा है। इसकी शायद दो मंजिले और होंगी जो केवल वाराणसी विकास प्राधिकरण के वीसी साहब के चश्मे को लगाने के बाद ही दिखाई देती है। या फिर पूरा का पूरा आदेश ही हवा में पास कर दिया गया है। सवाल ये उठता है कि जो भवन केवल जी+2 निर्मित ही है उसके जी+4 का ध्वस्तीकरण आदेश क्या केवल हवा में वर्ष 2003 में पास कर दिया गया था?

यह नोटिस इस बात को भी दर्शाती है कि अब वाराणसी विकास प्राधिकरण ‘गर्व से कहो हम घुसखोर है’ के तरफ भी इशारा करती है। चलिए एक बार को इसको लिपिकीय त्रुटी मान लिया जाता है कि जी+2 की जगह बड़े बाबू ने गलती से शायद नींद में लिखा होगा और जी+4 हो गया होगा। मगर सवाल ये उठता है कि ध्वस्तीकरण का आदेश आखिर कैसे 22 सालो तक फाइल के बोझ के नीचे दबा रहा और अचानक ही रातो रात वीसी साहब को मिल गया? मान भी लिया जाता है कि यह ध्वस्तीकरण आदेश वास्तव में वर्ष 2003 का है तो सवाल है कि 22 साल तक इसको दबाये रखने के लिए कितना पैसा वीसी साहब के विभाग ने लिया होगा ? यानि घुस कितनी लिया होगा साहब?

अचानक लगी इस नोटिस को लेकर शहर में चर्चाओं का बाज़ार गर्म है। लोग वाराणसी विकास प्राधिकरण के कार्यशैली पर ही प्रश्न उठा रहे है। 100 वर्ग फिट के जगह पर बने जी+2 को नक्शा स्वीकृति की आवश्यकता पड़ती है, इस नियम की जानकारी हमको तो नही थी। मगर अब वीसी साहब ने नोटिस भेज कर एक घंटे में भवन खाली करने का आदेश दे डाला है तो जानकारी हो गई। किस अधिकारी ने आदेश पास किया, कितने जोनल आये और गए, कितने जेई आये और इन 22 सालो में गए, मगर सुपर मैंन के तरह अब वर्त्तमान वीसी साहब को ये आदेश मिल जाना भी एक बड़ा सवाल पैदा करता है। फिलहाल भवन स्वामी मुख़्तार के बेटे अदनान ने हमसे बात करते हुवे बताया है कि ‘इस तरीके से नोटिस सिर्फ और सिर्फ मानसिक उत्पीडन के लिए दिया जा रहा है। हम इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेगे।’

हमारी निष्पक्ष पत्रकारिता को कॉर्पोरेट के दबाव से मुक्त रखने के लिए आप आर्थिक सहयोग यदि करना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें


Welcome to the emerging digital Banaras First : Omni Chanel-E Commerce Sale पापा हैं तो होइए जायेगा..

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *