दालमंडी चौडीकरण: प्रशासनिक कार्यवाई के खिलाफ हाई कोर्ट में दाखिल हुई अवमानना याचिका: सूत्र

तारिक आज़मी
वाराणसी: वाराणसी के दालमंडी मार्ग के चौडीकरण हेतु चल रही प्रशासनिक कवायद एक बार फिर हाई कोर्ट के दहलीज़ पर दस्तक दे चुकी है। इलाहाबाद हाई कोर्ट में मौजूद हमारे अधिवक्ता सूत्रों के माध्यम से मिली जानकारी के अनुसार एक हाई कोर्ट में दाखिल याचिकाकर्ता, जिसकी याचिका पर सुनवाई करते हुवे अदालत ने आदेश दिया था, ने यह अदालत की अवमानना का केस दाखिल किया है। जिसमे उसका दावा है कि अदालत के हुक्म की उदूली करते हुवे उनके भवन को तोड़ने की नोटिस दिया है।

बताते चले कि दालमंडी की गली को 17 मीटर चौड़ा करने का सरकारी प्रोजेक्ट है। इस परियोजना की ज़द में लगभग 186 भवन आ रहे है जिसमे से काफी भवन स्वामियों ने हाई कोर्ट का रुख किया और अदालत ने उनको रिलीफ देते हुवे निर्देशित किया है कि ‘बिना आपसी सहमती अथवा भूमि अधिग्रहण नियमो के भवनों को न तोडा जाए।’ इस क्रम में आपसी सहमती बनाने हेतु प्रशासन ने कैम्प भी अपना लगाया है। मगर उसको सफलता अधिक नहीं प्राप्त हुई है।
असली मसला इन 186 भवनों में निर्मित हज़ारो दुकानों का निकल कर सामने आ रहा है। क्योकि अधिकतर दुकानदारों ने मोटी रकम पगड़ी (goodwill) के तौर पर देकर किरायादारी लिखवाया है। भवन स्वामी अगर आपसी सहमती से भवन देने को तैयार हो जाते है तो उन दुकानदारों का भविष्य अंधकारमय हो जायेगा। इसका एक बड़ा उदाहरण लक्ष्मी कटरा है। जिसमे मौजूद 13 दुकानदारों को कोई भी लाभ नहीं मिला और उनकी दुकाने इस चौडीकरण के ज़द में आ गई है। जिसके कारण उनके भविष्य में अंधकार दिखाई दे रहा है।
अब देखना होगा कि अदालत के पटल पर पहुचने के बाद इस अवमानना याचिका को अदालत स्वीकार करती है अथवा नही। अगर यह याचिका स्वीकार होती है तो प्रशासन की मुश्किलें बढ़ सकती है।










