बंगाल में ‘वक़्फ़’ पर सियासी बवाल….! ममता सरकार ने मंज़ूर किया नया संशोधन कानून, BJP ने साधा निशाना

तारिक आज़मी

PNN24 न्यूज़ डेस्क: पश्चिम बंगाल की राजनीति में वक़्फ़ (Waqf) संपत्तियों को लेकर एक बड़ा सियासी घमासान छिड़ गया है। राज्य की ममता बनर्जी सरकार ने आखिरकार केंद्र सरकार के वक़्फ़ संशोधन कानून को मंज़ूरी दे दी है, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि ममता बनर्जी ने शुरू में इस कानून का जोरदार विरोध किया था, लेकिन महीनों बाद उनकी सरकार को इसे स्वीकार करना ही पड़ा।

क्या है वक़्फ़ संशोधन और ममता का यू-टर्न?

वक़्फ़ संशोधन कानून देश भर में वक़्फ़ बोर्डों और उनकी संपत्तियों के प्रबंधन (Management) को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए लाया गया था।

  • मंजूरी का फैसला: पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में इस संशोधित कानून को राज्य में लागू करने की मंज़ूरी दे दी।
  • शुरुआती विरोध: बीजेपी का आरोप है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले यह कहते हुए इस कानून का विरोध किया था कि यह राज्य के अधिकारों का उल्लंघन करता है या मुस्लिम समुदाय के हितों के खिलाफ है।
  • BJP का हमला: पश्चिम बंगाल बीजेपी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, “उन्होंने (ममता बनर्जी ने) शुरू में वक़्फ़ संशोधन का विरोध किया था। महीनों बाद, उनकी सरकार ने भारत सरकार के संशोधित वक़्फ़ कानून को स्वीकार कर लिया है।” बीजेपी ने इसे केंद्र की ताकत के आगे ममता सरकार का झुकना बताया है।

वोट बैंक की राजनीति या कानूनी मजबूरी?

ममता बनर्जी सरकार के इस यू-टर्न को लेकर सियासी गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

  • कानूनी दबाव: कई जानकारों का मानना है कि वक़्फ़ कानून केंद्र का विषय है और राज्य सरकारें इसे अनिश्चितकाल तक रोक नहीं सकती थीं। कानूनी बाध्यता के चलते ममता सरकार को यह फैसला लेना पड़ा।
  • अल्पसंख्यक वोट बैंक: वहीं, बीजेपी इसे ममता बनर्जी की अल्पसंख्यक समुदाय के बीच अपनी पकड़ को मजबूत करने की कोशिश बता रही है। वक़्फ़ संपत्तियों का प्रबंधन बंगाल में एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा रहा है।

क्या बदल जाएगा बंगाल में वक़्फ़ बोर्ड का काम?

इस संशोधन के लागू होने के बाद, पश्चिम बंगाल वक़्फ़ बोर्ड के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।

  • पंजीकरण और ऑडिट: संपत्तियों के पंजीकरण (Registration) और लेखा-जोखा (Audit) के नियम कठोर हो सकते हैं, जिससे वक़्फ़ संपत्तियों पर होने वाले अवैध कब्ज़े को रोकने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल, इस कानून पर ममता सरकार की मंजूरी ने बीजेपी को उन पर निशाना साधने का एक बड़ा मौका दे दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या यह ‘वक़्फ़ संशोधन’ बंगाल की राजनीति में कोई बड़ा समीकरण बदलता है या नहीं।

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