‘क्या भारतीय होने के लिए साइन बोर्ड लेकर चलें?’— त्रिपुरा के छात्र एंजल चकमा की हत्या पर दिल्ली में उबाल; देहरादून पुलिस ने 5 को किया गिरफ्तार

ईदुल अमीन
नई दिल्ली/देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में त्रिपुरा के एक छात्र की बेरहमी से हत्या ने एक बार फिर उत्तर भारत में पूर्वोत्तर (North-East) के छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव और सुरक्षा के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 9 दिसंबर को हुए हमले के बाद, 16 दिनों तक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ते हुए एमबीए छात्र एंजल चकमा ने दम तोड़ दिया। इस घटना के विरोध में दिल्ली में कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI ने कैंडल मार्च निकालकर अपना रोष जताया।

“हम भारत के अटूट अंग हैं, आप इसे झुठला नहीं सकते। हमें भारतीय साबित करने के लिए और कौन सा साइन बोर्ड लेकर चलना होगा? हम सभी देशवासियों से पूछना चाहते हैं कि क्या हमारी शक्ल हमें पराया बना देती है?”
क्या थी घटना? त्रिपुरा के रहने वाले एंजल चकमा देहरादून के सेलाकुई थाना क्षेत्र में एक निजी यूनिवर्सिटी से एमबीए फाइनल ईयर की पढ़ाई कर रहे थे। 9 दिसंबर को बाजार में उन पर चाकू और हाथ के कड़ों से जानलेवा हमला किया गया। हमले के समय एंजल का छोटा भाई माइकल भी वहां मौजूद था। बुरी तरह घायल एंजल को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 25 दिसंबर के आसपास उन्होंने अंतिम सांस ली।
पुलिसिया कार्रवाई और वर्तमान स्थिति: देहरादून पुलिस के मुताबिक, इस मामले में अब तक दो नाबालिगों सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। छठा आरोपी अभी भी फरार है जिसकी तलाश में छापेमारी की जा रही है। पुलिस का दावा है कि आरोपियों के खिलाफ कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
पूर्वोत्तर के छात्रों में असुरक्षा का भाव: इस घटना ने देश के महानगरों और शैक्षिक केंद्रों में पूर्वोत्तर के छात्रों की सुरक्षा को लेकर एक पुरानी बहस को फिर से जिंदा कर दिया है। छात्रों का आरोप है कि उन्हें अक्सर ‘नस्लीय टिप्पणियों’ (Racial Slurs) और भेदभाव का सामना करना पड़ता है, जो कभी-कभी इस तरह की हिंसक वारदातों में बदल जाता है।











