सिकंदर और नेपोलियन से भी आगे था चंगेज़ खान? जानें क्यों लोग उसे गलती से ‘मुस्लिम’ समझ बैठते हैं और क्या था उसका असली मजहब!, पढ़े गाजी अर्तगुल और उस्मान प्रथम ने कैसे मंगोल साम्राज्य के ज़ुल्म से दिलाया निजात

तारिक आज़मी

इतिहास की नजर से: दुनिया ने कई महान विजेता देखे हैं। सिकंदर महान (Alexander the Great) के पास अपने पिता फिलिप द्वारा तैयार की गई विशाल युद्ध मशीनरी थी। जूलियस सीज़र के पास 300 साल पुराना रोमन सैन्य श्रेष्ठता का गौरवपूर्ण इतिहास था। वहीं नेपोलियन बोनापार्ट फ्रांसीसी क्रांति से उपजे जन समर्थन की लहर पर सवार होकर राज कर पाए। लेकिन इन सबसे अलग, मंगोलिया के बंजर मैदानों से एक ऐसा योद्धा निकला जिसने शून्य से शुरुआत की और आधी दुनिया को अपने घोड़ों के खुरों तले रौंद दिया— वह था चंगेज़ खान

क्या चंगेज़ खान मुस्लिम था? अक्सर ‘खान’ उपनाम (Title) होने के कारण कई लोग यह मान बैठते हैं कि चंगेज़ खान का ताल्लुक इस्लाम से था। लेकिन यह एक बड़ी गलतफहमी है। चंगेज़ खान एक मंगोलियाई योद्धा था और उसका इस्लाम से कोई संबंध नहीं था। वह शामानी धर्म (Shamanism) का अनुयायी था, जिसमें ‘नीले आसमान’ (Tengri) की पूजा की परंपरा रही है। चंगेज़ खान की पहचान एक बेहद जालिम और निर्दयी हुक्मरान के तौर पर रही है, जिसकी सेनाओं ने उस दौर के कई मुस्लिम साम्राज्यों को तहस-नहस कर दिया था।

इतिहास का क्रूर चेहरा: हलाकू खान चंगेज़ खान के नक्शेकदम पर चलते हुए उसके वंशजों ने भी तबाही का मंजर जारी रखा। उसका पोता हलाकू खान इतिहास के सबसे जालिम शासकों में गिना जाता है। हलाकू खान ने ही बगदाद को तबाह किया और उस समय के ज्ञान के केंद्र को खून से लाल कर दिया था।

मंगोल बनाम उस्मानी साम्राज्य (Ottoman Empire) मंगोलों की इस बेखौफ और क्रूर ताकत को अगर किसी ने सबसे ज्यादा चुनौती दी, तो वे थे सल्तनत-ए-उस्मानिया (Ottoman Empire) की नींव रखने वाले एर्तागुल गाजी और उनके बेटे उस्मान प्रथम। एर्तागुल गाजी ने न केवल अपनी छोटी सी कबीलाई ताकत को संगठित किया, बल्कि मंगोलों के बढ़ते कदमों को रोककर एक ऐसे साम्राज्य का रास्ता साफ किया जिसने आगे चलकर सदियों तक दुनिया पर राज किया।

निष्कर्ष: चंगेज़ खान की कहानी हमें बताती है कि कैसे एक इंसान बिना किसी विरासत के दुनिया का सबसे बड़ा साम्राज्य खड़ा कर सकता है। लेकिन साथ ही, यह इतिहास का वह काला अध्याय भी है जहाँ मजहब और नाम के फेर में लोग अक्सर सच्चाई को भूल जाते हैं।

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