मुतवल्लियों को राहत! वक्फ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन पर तीन महीने तक कोई जुर्माना नहीं लगेगा, किरेन रिजिजू का एलान

तारिक आज़मी

PNN24 न्यूज़ डेस्क: केंद्र सरकार ने वक्फ कानून के तहत अपनी संपत्तियों को UMEEED पोर्टल पर दर्ज न करा पाए मुतवल्लियों (वक्फ संपत्ति के प्रबंधकों) को बड़ी राहत दी है। अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने शुक्रवार को घोषणा की कि अगले तीन महीनों तक UMEED पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन न कराने पर कोई जुर्माना नहीं लगाया जाएगा और न ही कोई सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह घोषणा ऐसे समय में आई है, जब वक्फ संपत्तियों को पोर्टल पर दर्ज कराने की अंतिम तारीख (5 दिसंबर) खत्म हो चुकी है और सुप्रीम कोर्ट ने भी समयसीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट से इंकार, लेकिन सरकार ने दी राहत

वक्फ संपत्तियों को UMEED पोर्टल पर दर्ज कराने के लिए छह महीने का समय दिया गया था, लेकिन लाखों संपत्तियां अभी भी पंजीकृत नहीं हो पाई हैं।

  • अंतिम तारीख: कई सांसदों और लोगों की मांग के बावजूद, सुप्रीम कोर्ट ने छह महीने की समयसीमा पार होने के बाद तारीख बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया था। 1 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा था कि इच्छुक लोग वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत वक्फ ट्रिब्यूनल में आवेदन कर राहत मांग सकते हैं, क्योंकि ट्रिब्यूनल के पास समय सीमा बढ़ाने का अधिकार है।
  • रिजिजू का आश्वासन: किरेन रिजिजू ने शुक्रवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा, मैं सभी मुतवल्लियों को आश्वासन देता हूं कि अगले तीन महीनों तक हम कोई जुर्माना नहीं लगाएंगे और न ही कोई कठोर कदम उठाएंगे, अगर वे UMEED पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करते हैं।
  • ट्रिब्यूनल जाने की सलाह: रिजिजू ने मुतवल्लियों से अनुरोध किया कि यदि वे अभी भी रजिस्टर नहीं कर पा रहे हैं, तो वे वक्फ ट्रिब्यूनल के पास जाएं, जो छह महीने तक समयसीमा बढ़ाने की शक्ति रखता है।

अब तक कितनी संपत्तियां हुई दर्ज?

केंद्रीय मंत्री ने वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण को अनिवार्य बताते हुए इसकी प्रगति की जानकारी भी दी।

  • पंजीकरण की स्थिति: रिजिजू ने बताया कि अभी तक 5 लाख से अधिक वक्फ संपत्तियां UMEED पोर्टल पर दर्ज की जा चुकी हैं।”
  • कानून से बंधे होने की बात: मंत्री ने जोर देकर कहा कि केंद्र सरकार अधिकतम राहत” देने की कोशिश करेगी, लेकिन वह भी कानून से बंधी हुई है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन करना आवश्यक है।

सरकार की यह तीन महीने की रियायत मुतवल्लियों के लिए एक अंतिम मौका है ताकि वे बिना जुर्माने के अपनी संपत्तियों का पंजीकरण सुनिश्चित कर सकें।

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