हद हो गई….! मिड-डे मील में बच्चों को अंडा खिलाने के बहाने फ़ोटो खिंचवाई, फिर वापस ले लिया; मुंगेर के प्रिंसिपल सस्पेंड

शफी उस्मानी
PNN24 न्यूज़ डेस्क: बिहार के मुंगेर में एक स्कूल प्रिंसिपल ने ‘हाथ को आया, लेकिन मुंह को न लगा‘ वाली कहावत को सच कर दिखाया है! मिड-डे मील (Mid-Day Meal) योजना में बच्चों के साथ ऐसी हरकत की गई कि मामला सामने आने पर पूरे शिक्षा विभाग को शर्मिंदा होना पड़ा। आरोप है कि प्राथमिक विद्यालय फरीदपुर के प्रिंसिपल सुजीत कुमार ने बच्चों की प्लेट में अंडा परोसा, उसकी तस्वीरें खिंचवाईं और फिर बच्चों से अंडे वापस ले लिए।
तस्वीर खिंचवाने के बाद वापस ले लिया अंडा
यह चौंकाने वाली घटना 21 नवंबर, शुक्रवार को हुई। छात्रों ने जब घर जाकर अपने परिजनों को यह पूरी बात बताई, तो पेरेंट्स का गुस्सा फूट पड़ा।
- बच्चों का बयान: बच्चों ने परिजनों को बताया कि ‘प्रिंसिपल सर ने उनके प्लेट में अंडे परोसे। फोटो खिंचवाई। फिर अंडे वापस ले लिए गए।‘
- पेरेंट्स का हंगामा: इसके बाद पेरेंट्स ने स्कूल पहुंचकर प्रिंसिपल सुजीत कुमार के खिलाफ हंगामा किया और कार्रवाई की मांग की।
- वीडियो वायरल: घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पेरेंट्स प्रिंसिपल से सवाल पूछते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में बच्चे भी आरोप दोहरा रहे हैं, वहीं प्रिंसिपल फोटो खींचकर विभाग को भेजने की बात कहते दिखाई दे रहे हैं।
एक छात्र ने स्पष्ट बताया कि खाने में सभी छात्रों को अंडा दिया गया, लेकिन फोटो खिंचाने के बाद सर ने अंडा वापस ले लिया।
जाँच में आरोप सही, प्रिंसिपल निलंबित
यह पूरा प्रकरण स्थानीय प्रशासन तक भी पहुंचा। जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कुणाल गौरव ने तुरंत इस मामले को संज्ञान में लिया।
- जाँच की पुष्टि: डीईओ ने बताया कि मामला जमालपुर प्रखंड का है और आरोपों की जाँच के लिए डीपीओ एमडीएम (DPO MDM) से जाँच कराई गई।
- सस्पेंड: जाँच रिपोर्ट में आरोप सही पाए गए। नतीजतन, प्रिंसिपल सुजीत कुमार को तुरंत प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया गया है।
- विभागीय कार्रवाई: डीईओ ने बताया कि उन पर विभागीय कार्रवाई चल रही है, जिसे जल्द ही पूरा करके कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। निलंबन के बाद सुजीत कुमार को टेटीया बंबर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी दफ्तर में अटैच कर दिया गया है।
बच्चों के भोजन को लेकर इस तरह की धोखाधड़ी और शर्मनाक हरकत ने न केवल मिड-डे मील योजना पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि एक शिक्षक के नैतिक मूल्यों पर भी गहरा आघात किया है।











