‘वंदे मातरम्’ बनाम ‘यात्री फँसे’: महबूबा मुफ़्ती ने इंडिगो संकट पर बीजेपी को घेरा

तारिक खान

श्रीनगर/नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ़्ती ने इंडिगो एयरलाइंस (IndiGo Airlines) में चल रहे व्यापक विमान देरी और रद्द होने के संकट के बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर कड़ा प्रहार किया है। मुफ़्ती ने अपने एक्स‘ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर एक तीखा पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने संसद में चल रही बहस को आम जनता की वास्तविक परेशानियों से ध्यान भटकाने वाला बताया।

संसद की बहस पर सवाल

महबूबा मुफ़्ती ने अपनी पोस्ट में इस बात पर निराशा व्यक्त की कि एक तरफ़ जहाँ देश भर के हवाईअड्डों पर इंडिगो के यात्री उड़ानें रद्द होने और लंबी देरी के कारण फँसे हुए हैं और जवाब पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर देश की संसद दो सौ साल पुराने वंदे मातरम् जैसे प्रतीकात्मक मुद्दों पर बहस करने में उलझी हुई है।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा:

संसद दो सौ साल पुराने वंदे मातरम को लेकर बहस में उलझी हुई है, जबकि इंडिगो के यात्री फंसे हुए हैं और जवाब पाने के लिए परेशान हैं।”

उनका इशारा हाल ही में लोकसभा में हुए एक विशेष चर्चा की ओर था, जहाँ प्रधानमंत्री मोदी और अन्य नेताओं ने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व पर अपनी राय रखी थी।

बीजेपी पर ‘खोखले प्रतीकवाद’ का आरोप

मुफ़्ती ने अपने अगले बयान में बीजेपी पर सीधे निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़ी समस्याओं से मुँह मोड़ रही है।

  • खोखला प्रतीकवाद: उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों की परेशानी से जुड़े संकटों का सामना करने के बजाय वर्तमान में बीजेपी केवल खोखले प्रतीकवाद में दिलचस्पी ले रही है। उनका मानना है कि सरकार का ध्यान ज़मीनी हकीकत से हटकर भावनात्मक और ऐतिहासिक प्रतीकों पर केंद्रित हो गया है।
  • इंडिगो संकट: गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से देश के प्रमुख हवाईअड्डों पर घने कोहरे, पायलटों की कमी और खराब मौसम के कारण इंडिगो की सैकड़ों उड़ानें रद्द या विलंबित हुई हैं, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा है।

असली समस्याओं का समाधान कहाँ?

महबूबा मुफ़्ती ने अपने पोस्ट के अंत में बीजेपी की नीतियों और प्राथमिकताओं पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि यह राजनीतिक दिखावा आम नागरिकों के जीवन की असल समस्याओं का समाधान कैसे करेगा:

यह राजनीतिक दिखावा रोज़गार कैसे पैदा करेगा, बढ़ती क़ीमतों पर कैसे काबू पाएगा या उन असल समस्याओं का समाधान कैसे करेगा जो करोड़ों भारतीयों पर भारी पड़ रही हैं?”

उनका यह बयान देश की जनता के उन बड़े सरोकारों को दर्शाता है, जिनमें बेरोज़गारी, महंगाई (बढ़ती क़ीमतें) और आर्थिक अस्थिरता शामिल हैं। मुफ़्ती के इस ट्वीट ने एक बार फिर राजनीतिक प्राथमिकताओं और शासन की दिशा पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।

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