‘वंदे मातरम’ सिर्फ़ गीत नहीं, प्रेरणा है: PM मोदी ने गांधीजी का ज़िक्र कर लोकसभा में दिया संदेश

आफताब फारुकी
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हुई विशेष चर्चा की शुरुआत करते हुए देश के राष्ट्रगीत के महत्व को रेखांकित किया और स्वतंत्रता संग्राम में इसकी भूमिका को याद किया। इस दौरान, उन्होंने महात्मा गांधी के एक पत्र का ज़िक्र करते हुए विपक्ष पर वंदे मातरम् के साथ अतीत में हुए ‘अन्याय’ को लेकर निशाना साधा।
गांधीजी के हवाले से पीएम मोदी का वक्तव्य
प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के एक पत्र का हवाला देते हुए सदन को बताया कि गांधीजी ने वंदे मातरम् की लोकप्रियता और देश पर इसके प्रभाव को किस तरह देखा था।
- गांधीजी का उद्धरण: पीएम मोदी ने कहा कि बापू ने अपने पत्र में लिखा था कि, “वंदे मातरम् इतना लोकप्रिय हो गया है, जैसे कि यह हमारा राष्ट्रगान हो गया है।“
- सन्देश: प्रधानमंत्री ने इस उद्धरण के माध्यम से बताया कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत आम जनता की भावनाओं से कितना गहरा जुड़ा हुआ था और यह सिर्फ़ एक गीत नहीं, बल्कि आज़ादी का मंत्र बन गया था।
- आरोप: पीएम मोदी ने यह भी कहा कि पिछली शताब्दी में इस गीत के साथ अन्याय किया गया और इसकी उपेक्षा की गई। उन्होंने परोक्ष रूप से कांग्रेस और जवाहरलाल नेहरू पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कुछ लोगों ने इसे मुस्लिमों को नाराज़ न करने के बहाने विरोधियों के सामने झुककर इसके कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों को हटा दिया था।
“वंदे मातरम्” – स्वतंत्रता आंदोलन की ऊर्जा
प्रधानमंत्री ने कहा कि बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा रचित यह गीत ब्रिटिश हुकूमत के ख़िलाफ़ ईंट का जवाब पत्थर से देने जैसा था, जब अंग्रेज़ अपने राष्ट्रगीत को भारतीयों पर थोप रहे थे।
- एकता का प्रतीक: उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि वंदे मातरम् ने देश को उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक एक सूत्र में बाँधा। खुदीराम बोस, अशफ़ाक उल्ला ख़ान और राम प्रसाद बिस्मिल जैसे अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों ने वंदे मातरम् कहते हुए फांसी के फंदे को चूमा था।
- प्रेरणा और संकल्प: पीएम मोदी ने इसे सिर्फ़ गीत या भाव गीत नहीं, बल्कि प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा कि यह आज भी नए भारत की ऊर्जा, एकता और संकल्प का आधार बना हुआ है, जो हमें 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने की प्रेरणा देता है।
जब देश इमरजेंसी के शिकंजे में था
पीएम मोदी ने वंदे मातरम् के 150 साल की यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ावों को याद किया। उन्होंने कहा कि जब यह गीत 50 साल का हुआ तब देश गुलामी की जंजीरों में था और जब इसके 100 साल पूरे हुए, तब देश आपातकाल (Emergency) के काले कालखंड में था।
- काला अध्याय: उन्होंने कहा कि आपातकाल में संविधान का गला घोंट दिया गया था और देशभक्ति के लिए जीने वाले लोगों को जेलों में ठूंस दिया गया था। उन्होंने वर्तमान अवसर को वंदे मातरम् के गौरव को पुनर्स्थापित करने का मौका बताया।
यह विशेष चर्चा यह दर्शाती है कि वंदे मातरम् केवल इतिहास का हिस्सा नहीं है, बल्कि आज भी देश की राजनीति और राष्ट्रीय भावनाओं के केंद्र में है।











