संसद का शीतकालीन सत्र संपन्न! मनरेगा की विदाई और न्यूक्लियर सेक्टर में निजी एंट्री; जानें 19 दिनों के बड़े फैसले

निलोफर बानो

PNN24 न्यूज़, नई दिल्ली। संसद का 19 दिनों तक चला हंगामेदार शीतकालीन सत्र (Winter Session) शुक्रवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। 1 दिसंबर से शुरू हुए इस सत्र में मोदी सरकार ने कई दूरगामी और ऐतिहासिक विधेयक पारित किए, जिन्होंने देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था से लेकर ऊर्जा क्षेत्र तक की तस्वीर बदल दी है।

सत्र की सबसे बड़ी सुर्खियां: दो क्रांतिकारी बिल

इस शीतकालीन सत्र को मुख्य रूप से दो बड़े कानूनों के पारित होने के लिए याद किया जाएगा:

  • मनरेगा का अंत (VB- GRAM JI Bill): सरकार ने 20 साल पुरानी ‘मनरेगा’ योजना को समाप्त कर उसकी जगह ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी ‘वीबी- जी राम जी’ विधेयक पारित किया। विपक्ष ने इसे “गरीबों के साथ विश्वासघात” बताया, जबकि सरकार ने इसे ग्रामीण विकास का नया अध्याय कहा।
  • ‘शांति’ विधेयक (SHANTI Bill): न्यूक्लियर एनर्जी (परमाणु ऊर्जा) सेक्टर में अब निजी क्षेत्र (Private Players) के लिए दरवाजे खोल दिए गए हैं। ‘स्ट्रैटेजिक हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी फॉर इंडिया’ (SHANTI) विधेयक के जरिए भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए निजी निवेश को आमंत्रित करेगा।

शीतकालीन सत्र 2025: एक नजर में

विवरण जानकारी
प्रारंभ तिथि 1 दिसंबर, 2025
समापन तिथि 19 दिसंबर, 2025
कुल अवधि 19 दिन
सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित (Adjourned Sine Die)
प्रमुख उपलब्धि देर रात तक चर्चा और अहम बिलों को मंजूरी

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का संबोधन

शुक्रवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपना समापन भाषण दिया। उन्होंने सांसदों की कार्यक्षमता की सराहना करते हुए कहा:

“सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण कानूनों पर गहन चर्चा हुई। हमारे माननीय सांसद देशहित के विषयों पर चर्चा के लिए देर रात तक सदन में बैठे रहे, जो लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक है।”

इसके तुरंत बाद, उन्होंने लोकसभा की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा की। राज्यसभा में भी इसी प्रकार की प्रक्रिया के साथ सत्र का समापन हुआ।

विपक्ष का रुख

पूरे सत्र के दौरान विपक्ष ने ‘जी राम जी’ विधेयक और दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण के मुद्दे पर सरकार को जमकर घेरा। तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के सदस्यों ने मनरेगा को खत्म करने के फैसले को “ऐतिहासिक भूल” करार दिया।

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