दालमंडी चौडीकरण: मस्जिद लंगड़े हाफ़िज़ के सम्बन्ध में प्रशासनिक प्रतिनिधि से बोले एसएम यासीन ‘हम मस्जिद के बदले न धन लेंगे और न दूसरी भूमि, तश्तरी में सजाकर मस्जिद नही देगे, भरपूर विरोध करेगे, ये विकास नहीं महाविनाश योजना है’
शफी उस्मानी
वाराणसी: दालमंडी चौडीकरण के सम्बन्ध में जिलाधिकारी द्वारा जारी भूमि अधिग्रहण हेतु आदेश के बाद मुख्य मसला आकर मस्जिदों के सम्बन्ध में फंस जा रहा है। इसमें सबसे प्रमुख रूप से नई सड़क स्थित मस्जिद लंगड़े हाफ़िज़ है। जिसका मूल नाम मस्जिद खुदाबक्श जायसी है। इस मस्जिद की देख रेख करने वाली वह ही संस्था है जो ज्ञानवापी मस्जिद की देख रेख करती है। संस्था का नाम अंजुमन मसाजिद इंतेजामिया कमेटी है।

इस मामले में हमको जानकारी देते हुवे आज एसएम यासीन ने बताया कि ‘दालमंडी चौड़ीकरण प्रोजेक्ट को लेकर ज़िलाधिकारी वाराणसी द्वारा भूमि अधिग्रहण हेतु समाचार पत्रों में प्रकाशित नोटिफिकेशन को लेकर एक अधिकारी ने भेंट कर मस्जिद खुदाबक्श जायसी (लंगड़े हाफिज) को लेकर हमारी मंशा जानने की कोशिश की। जिसमें अंजुमन इन्तेज़ामिया मसाजिद के सदस्य शमशेर अली भी उपस्थित थे।’
उन्होंने बताया कि ‘इस सम्बन्ध में अंजुमन मसाजिद के रेज़ेलयुशन से आने वाले अधिकारी को हमने अवगत करा दिया, कि हम मस्जिद के बदले कोई भी भूमि अथवा धन नहीं लेंगे। हम तशतरी में सजाकर मस्जिद नहीं देंगे। भरपूर विरोध किया जाएगा। वहाँ किसी भी प्रकार का तोड़फोड़ कानून विरूद्ध होगा। यह पूरा प्रोजेक्ट ही विनाशकारी है। लाखों लोग प्रभावित होंगे। दूसरे इस गली को नेशनल हाईवे जैसा बनाने का पुरज़ोर विरोध होगा।’
एसएम यासीन ने बताया कि ‘हमारे द्वारा साफ़ साफ कहा गया है कि ‘वीआइपी मूवमेंट से पूरे नगर की ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा जाती है। अतः सबसे सुरक्षित और सुगम साधन नगर में बन रहे रोपवे का सदुपयोग किया जाय। हमारी मस्जिद और मादारिस को इससे अलग रखा जाए और दालमंडी प्रोजेक्ट कैसिल हो क्योकि इससे विकास नहीं बल्कि महाविनाश होगा।’
क्या है विवाद की जड़?
वाराणसी प्रशासन दालमंडी और आसपास के घने इलाकों में सड़कों को चौड़ा करने की योजना पर काम कर रहा है।
- मस्जिद का मुद्दा: इस योजना के दायरे में ‘मस्जिद लंगड़े हाफ़िज़’ का कुछ हिस्सा या पूरी मस्जिद आने की चर्चा है, जिसका मुस्लिम समुदाय और मस्जिद कमेटी विरोध कर रही है।
- व्यापारियों की चिंता: दालमंडी एक बड़ा व्यापारिक केंद्र है। चौड़ीकरण से न केवल धार्मिक स्थल बल्कि सैकड़ों दुकानों और आजीविका पर भी संकट मंडरा रहा है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
एस.एम. यासीन के इस बयान के बाद इलाके में हलचल तेज हो गई है। स्थानीय लोगों और नमाजियों का कहना है कि मस्जिद का वजूद उनकी आस्था से जुड़ा है और वे किसी भी कीमत पर इसे हटने नहीं देंगे। दूसरी ओर, प्रशासन का तर्क है कि शहर के सुगम यातायात और विकास के लिए सड़कों का चौड़ा होना अनिवार्य है।











