दालमंडी चौडीकरण: जाने कौन-कौन मस्जिद आ रही चौडीकरण की ज़द में और क्या है उनके महत्व तथा क्या हो सकती है मस्जिद पक्ष की दलील और क्या हो सकता है इसका विकल्प

तारिक आज़मी

वाराणसी: वाराणसी के दालमंडी चौड़ीकरण प्रोजेक्ट की जद में आने वाली मस्जिदों को लेकर प्रशासन और मुस्लिम समुदाय के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। सर्वे और प्रशासनिक रिपोर्टों के अनुसार, कुल 6 मस्जिदें इस योजना के दायरे में आ रही हैं। प्रशासनिक सर्वे और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इन मस्जिदों की सूची निम्नलिखित है:

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दालमंडी चौड़ीकरण की जद में आने वाली मस्जिदें

क्रम मस्जिद का नाम संक्षिप्त विवरण
1 मस्जिद लंगड़े हाफ़िज़ यह इस विवाद का मुख्य केंद्र है। प्रशासन ने इस पर ‘लाल निशान’ लगाया है, जिसका एस.एम. यासीन ने कड़ा विरोध किया है।
2 मस्जिद मिर्जा करीमुल्लाह बेग यह ऐतिहासिक मस्जिद भी चौड़ीकरण के नक्शे में शामिल है।
3 मस्जिद संगमरमर अपने विशिष्ट निर्माण के लिए जानी जाने वाली यह मस्जिद भी प्रभावित संरचनाओं की सूची में है।
4 मस्जिद अली रजा खान दालमंडी इलाके की यह पुरानी मस्जिद भी सड़क चौड़ी करने के दायरे में है।
5 मस्जिद निसारन यह मस्जिद भी 56 फीट चौड़ी सड़क के प्रस्तावित मार्ग में आ रही है।
6 मस्जिद रंगीले शाह प्रशासन की सूची में यह छठी मस्जिद है जिसे शिफ्ट करने या अधिग्रहित करने की योजना है।

वर्तमान स्थिति: मुख्य अपडेट्स

  • मुफ्ती-ए-बनारस का पत्र: मुफ्ती-ए-बनारस मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी ने हाल ही में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इन 6 मस्जिदों को बचाने की अपील की है। उन्होंने इसे ‘संवैधानिक और धार्मिक भावनाओं के खिलाफ’ बताया है।
  • अंजुमन इंतजामिया की चेतावनी: एस.एम. यासीन ने स्पष्ट किया है कि मस्जिदें ‘प्लेसेस ऑफ वरशिप एक्ट’ से संरक्षित हैं और प्रशासन का यह कदम ‘अदालत की अवमानना’ (Contempt of Court) माना जाएगा।
  • नगर निगम के नोटिस: हाल ही में नगर निगम ने इन मस्जिदों सहित 151 भवनों को वाटर और सीवर टैक्स बकाया (लगभग 1.78 करोड़) के नोटिस भी जारी किए हैं, जिसे स्थानीय लोग ‘दबाव बनाने की रणनीति’ के रूप में देख रहे हैं।
  • व्यापारियों का आक्रोश: इस प्रोजेक्ट से न केवल ये मस्जिदें, बल्कि लगभग 10,000 दुकानदारों की आजीविका पर भी खतरा मंडरा रहा है, जिनमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के व्यापारी शामिल हैं।

क्या हो सकता है वैकल्पिक समाधान?

विपक्ष और मुस्लिम धर्मगुरुओं का सुझाव है कि:

  1. सड़क की चौड़ाई 17.5 मीटर (56-60 फीट) से घटाकर 8-10 मीटर रखी जाए ताकि प्राचीन ढांचे सुरक्षित रहें।
  2. दालमंडी को ‘नो-व्हीकल ज़ोन’ घोषित कर दिया जाए, जिससे चौड़ीकरण की आवश्यकता ही न रहे।

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