‘ये सब तिकड़म है!’ – एसआईआर पर सपा नेता रामगोपाल यादव का सीधा हमला

आफताब फारुकी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर माहौल गरम है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बाद अब समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और महासचिव रामगोपाल यादव ने भी इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

रामगोपाल यादव ने ‘एसआईआर’ को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की मंशा पर संदेह व्यक्त करते हुए इसे ‘सत्ता में बने रहने की तिकड़म’ करार दिया है।

रामगोपाल यादव का तीखा बयान

सपा नेता रामगोपाल यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जिस तरह से यह पुनरीक्षण प्रक्रिया जल्दबाजी में और अत्यधिक दबाव के साथ लागू की जा रही है, उससे साफ पता चलता है कि यह निष्पक्ष चुनाव कराने की कोशिश कम, बल्कि चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश ज्यादा है।

“ये सब तिकड़म सत्ता में बने रहने के लिए है। जानबूझकर लोगों की लिस्ट से नाम काटे जा रहे हैं। जिस तेजी से और जिस दबाव में यह SIR का काम कराया जा रहा है, वह बिल्कुल अमानवीय है और लोकतंत्र के लिए खतरा है।”

रामगोपाल यादव, महासचिव, समाजवादी पार्टी

लोकतंत्र के लिए बताया ‘खतरा’

रामगोपाल यादव ने जोर देकर कहा कि मतदाता सूची किसी भी लोकतंत्र की नींव होती है और इस तरह की ‘संदिग्ध’ प्रक्रिया से पूरी चुनाव प्रक्रिया पर लोगों का विश्वास डगमगाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल उन क्षेत्रों को निशाना बना रहा है जहां वे कमजोर हैं, और विपक्षी दलों के समर्थक मतदाताओं के नाम जानबूझकर सूची से हटाए जा रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर यह प्रक्रिया जारी रहती है और लाखों लोगों के नाम सूची से हटा दिए जाते हैं, तो यह सीधे तौर पर मतदाताओं के मौलिक अधिकार का हनन होगा।

विपक्षी एकता की मांग

सपा नेता ने जोर दिया कि भारतीय चुनाव आयोग (ECI) को इस पूरे मामले में पारदर्शिता लानी चाहिए और तुरंत इस प्रक्रिया की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने सभी विपक्षी दलों से अपील की कि वे एकजुट होकर इस ‘अन्यायपूर्ण’ एसआईआर प्रक्रिया का विरोध करें, ताकि स्वस्थ और निष्पक्ष लोकतंत्र को बचाया जा सके। यह बयान ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में एसआईआर को लेकर फील्ड वर्कर्स पर अत्यधिक दबाव की खबरें आ रही हैं और कई राजनीतिक दल पहले ही इस पर सवाल उठा चुके हैं।

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