अजित पवार के निधन से महाराष्ट्र की राजनीति में महा-संकट; क्या शरद पवार के इर्द-गिर्द फिर एकजुट होगा मराठा वोट बैंक? सरकार की स्थिरता और भविष्य का पूरा विश्लेषण

अजित पवार के निधन से महाराष्ट्र की राजनीति में महा-संकट; क्या शरद पवार के इर्द-गिर्द फिर एकजुट होगा मराठा वोट बैंक? सरकार की स्थिरता और भविष्य का पूरा विश्लेषण

ईदुल अमीन 

मुंबई/बारामती: महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार का एक विमान हादसे में आकस्मिक निधन न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि राज्य की समूची राजनीति के लिए एक ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित होने जा रहा है। 66 वर्षीय अजित पवार उस समय दुनिया से विदा हुए जब वे महाराष्ट्र की सत्ता संरचना में बीजेपी और एकनाथ शिंदे के बीच सबसे मज़बूत कड़ी बने हुए थे।

राजनीति का ‘पावर गेम’ और अजित पवार: जुलाई 2023 में अपने चाचा शरद पवार से बगावत कर बीजेपी खेमे में शामिल होने वाले अजित पवार ने खुद को असली ‘NCP’ का नेता साबित कर दिया था। नवंबर 2024 के चुनावों में उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया था कि पार्टी संगठन पर उनकी पकड़ शरद पवार से कहीं अधिक मज़बूत है।

विश्लेषण: अब क्या होगा महाराष्ट्र में?

  1. शरद पवार के प्रति सहानुभूति की लहर: राजनीतिक विश्लेषक जयदेव डोले के अनुसार, अजित पवार का जाना शरद पवार के लिए व्यक्तिगत रूप से एक बड़ा आघात है, लेकिन राजनीतिक रूप से पूरी सहानुभूति अब उनके साथ जा सकती है। 5 फरवरी से होने जा रहे जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों में ‘मराठा कार्ड’ फिर से शरद पवार के पक्ष में खेल सकता है।
  2. मराठा वर्चस्व और बीजेपी की चुनौती: महाराष्ट्र में खेती, शिक्षा और बैंकिंग सेक्टर पर मराठा जाति का वर्चस्व रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बीजेपी के उभार के साथ मराठा समुदाय को अपनी हैसियत कम होती महसूस हो रही थी। अजित पवार की गैरमौजूदगी में अब यह पूरा तबका शरद पवार के नेतृत्व में फिर से एकजुट हो सकता है, जो बीजेपी के लिए भविष्य में बड़ी चुनौती बनेगा।
  3. सरकार की स्थिरता: 288 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी के पास 132 सीटें हैं (बहुमत से 12 कम)। एकनाथ शिंदे की शिवसेना (57) और अजित पवार की एनसीपी (41) के समर्थन से सरकार चल रही है। अजित पवार के न रहने पर भी सरकार संख्या बल में सुरक्षित है, लेकिन नैतिक और रणनीतिक दबाव बढ़ जाएगा।
  4. शिंदे का बढ़ता कद: अजित पवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के लिए एक ‘बैलेंसिंग फैक्टर’ माना जाता था। वे एकनाथ शिंदे की शक्ति को संतुलित करते थे। अब शिंदे की मोलभाव (Bargaining) करने की शक्ति बढ़ सकती है, क्योंकि बीजेपी के पास अब दूसरा कोई बड़ा विकल्प नहीं बचा है।

क्षेत्रीय राजनीति बनाम हिंदुत्व: पत्रकार विनया देशपांडे के मुताबिक, हिंदुत्व की राजनीति के बीच अजित पवार ने अपनी क्षेत्रीय पहचान बनाए रखी थी। अब सवाल यह है कि अजित पवार के बाद उनका 41 विधायकों का गुट किसके साथ जाएगा? क्या वे शरद पवार के पास वापस लौटेंगे या बीजेपी में विलय करेंगे?

PNN24 न्यूज़ का निष्कर्ष: अजित पवार का निधन महाराष्ट्र की मराठा राजनीति के पुनरुद्धार का कारण बन सकता है। शरद पवार अपने ‘जीवन के सांध्य काल’ में एक बार फिर पार्टी को खड़ा करने की कोशिश करेंगे। यदि NCP फिर से एकजुट होती है, तो यह महाराष्ट्र में ‘महायुति’ के लिए खतरे की घंटी हो सकती है।

हमारी निष्पक्ष पत्रकारिता को कॉर्पोरेट के दबाव से मुक्त रखने के लिए आप आर्थिक सहयोग यदि करना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें


Welcome to the emerging digital Banaras First : Omni Chanel-E Commerce Sale पापा हैं तो होइए जायेगा..

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *