सतुआ बाबा से कालनेमि तक: कौन हैं शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद? जिनके समर्थन और विरोध में बंटा संत समाज और सियासत; जानें विवाद की पूरी कहानी

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद: छात्र राजनीति से धर्म के शिखर तक का सफर और विवादों से पुराना नाता। जानिए कौन है 'कालनेमि' जिसका जिक्र सीएम योगी ने किया और क्यों बंटे हुए हैं संत समाज के विचार। PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

आफताब फारुकी

प्रयागराज/वाराणसी: प्रयागराज माघ मेले में शुरू हुआ विवाद अब व्यक्तिगत हमलों और पौराणिक संदर्भों तक पहुँच गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘कालनेमि’ वाले बयान ने इस विवाद को और हवा दे दी है। आइए समझते हैं कि इस पूरे प्रकरण के पीछे के पात्र और विवाद का आधार क्या है।

कौन है ‘कालनेमि’ जिसका जिक्र मुख्यमंत्री ने किया?

हिंदू पौराणिक मान्यताओं और रामायण के अनुसार, कालनेमि रावण का भाई और एक अत्यंत मायावी राक्षस था। जब हनुमान जी लक्ष्मण के लिए संजीवनी बूटी लेने जा रहे थे, तब कालनेमि ने एक साधु का वेश धरकर उन्हें रोकने और भ्रमित करने का प्रयास किया था। मुख्यमंत्री के इस संदर्भ पर पलटवार करते हुए अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा:

“एक मुख्यमंत्री को शिक्षा, स्वास्थ्य और खुशहाली की बात करनी चाहिए, न कि कालनेमि और धर्म-अधर्म की। यह काम धर्माचार्यों का है।”

संत समाज में फूट: रामभद्राचार्य बनाम अन्य शंकराचार्य

इस विवाद पर संत समाज दो धड़ों में बंटा नज़र आ रहा है:

  • विरोध में: जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने सरकार का समर्थन करते हुए कहा कि नियमतः गंगा तक रथ से नहीं जाया जाता। उन्होंने कहा— “अन्याय अविमुक्तेश्वरानंद ने किया है, उनके साथ अन्याय नहीं हुआ।”
  • समर्थन में: द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती समेत तीन अन्य शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ खड़े हैं। उनका मानना है कि प्रशासन का प्रमाण मांगना गलत है।

अविमुक्तेश्वरानंद: छात्र नेता से शंकराचार्य तक का सफर

15 अगस्त 1969 को प्रतापगढ़ के ब्राह्मणपुर में जन्मे उमाशंकर पांडेय (अब अविमुक्तेश्वरानंद) का जीवन संघर्षपूर्ण रहा है:

  • छात्र राजनीति: 1994 में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में ABVP की ओर से छात्रसंघ चुनाव लड़ा।
  • दीक्षा: जगद्गुरु स्वरूपानंद सरस्वती के सबसे प्रिय शिष्य रहे। 2003 में दंड संन्यास की दीक्षा ली।
  • संघर्ष: सपा सरकार में लाठीचार्ज झेला, गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित कराने के लिए उपवास किया और ज्ञानवापी में पूजा की मांग उठाई।

विवादों का केंद्र: पदवी और राहुल गांधी

  1. पदवी विवाद: 11 सितंबर 2022 को गुरु के निधन के बाद उन्होंने ज्योतिष पीठ संभाली, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनके पट्टाभिषेक पर रोक लगा दी थी। मामला अभी भी विचाराधीन है।
  2. राहुल गांधी से रिश्ता: कभी राहुल गांधी के बचाव में उतरने वाले अविमुक्तेश्वरानंद ने एक साल बाद ही उन्हें हिंदू धर्म से बहिष्कृत करने की मांग कर दी। कारण था— राहुल द्वारा ‘मनुस्मृति’ का कथित अपमान। हालांकि, हाल ही में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने उनसे मिलकर समर्थन जताया है।

📊 क्विक प्रोफाइल: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

विवरण जानकारी
जन्म नाम उमाशंकर पांडेय
जन्म स्थान प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश
गुरु जगद्गुरु स्वरूपानंद सरस्वती
प्रमुख आंदोलन गंगा सुरक्षा, काशी कॉरिडोर विरोध, केदारनाथ सोना घोटाला आरोप
वर्तमान स्थिति ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य (पदवी पर कोर्ट में विवाद जारी)

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