छत्तीसगढ़ का महा-घोटाला: हर घंटे गायब हो रहा एक ट्रक धान, ‘चूहे-पक्षी’ के नाम पर ₹19 करोड़ की डकैती! क्या सच में सूख रहा है धान?

तारिक खान
डेस्क: छत्तीसगढ़, जिसे देश का ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है, इन दिनों एक ऐसे ‘अदृश्य’ संकट से जूझ रहा है जो कागजों पर प्राकृतिक है लेकिन हकीकत में एक संगठित भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहा है। सरकारी गोदामों से करोड़ों का धान गायब हो रहा है और जब जवाब माँगा जाता है, तो सरकारी दफ्तरों से जवाब मिलता है— “चूहे खा गए, पक्षी चुग गए या हवा में सूख गया।”

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गणित समझिए: यह नुकसान हर दिन 272 क्विंटल और हर घंटे औसतन 11 क्विंटल है। यानी दिन-रात, हर घंटे एक पूरा ट्रक धान रहस्यमयी तरीके से ‘गायब’ हो रहा है।
नुकसान का केंद्रवार ब्यौरा:
केंद्र गायब धान (क्विंटल) प्रतिशत नुकसान
- बसना 13,428 79%
- बागबाहरा 18,395 69%
- सरायपाली 17,188 65%
- महासमुंद 25,780 63%
- पिथौरा 6,828 67%
नियमों की धज्जियां और अधिकारियों की ‘सफाई’: महासमुंद के जिला मार्केटिंग अधिकारी आशुतोष कोसारिया और बागबाहरा प्रभारी दीपेश पांडेय का तर्क है कि 11 महीने तक धान रखने से वजन कम होना (सूखना) स्वाभाविक है। लेकिन सवाल यह है कि 12 सितंबर 2025 के सरकारी सर्कुलर का पालन क्यों नहीं हो रहा?
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सर्कुलर कहता है: 1% कमी पर नोटिस, 1-2% पर जांच और 2% से ज्यादा पर सस्पेंशन और FIR अनिवार्य है। यहाँ 3% से ज्यादा नुकसान को ‘सामान्य’ बताकर फाइलों में दबाया जा रहा है।
कवर्धा और जशपुर में खुला ‘फर्जीवाड़ा’ का खेल: यह सिर्फ सूखने का मामला नहीं है। कवर्धा (कबीरधाम) में 26,000 क्विंटल धान गायब होने की जांच हुई, तो पता चला कि वहां सीसीटीवी कैमरे जानबूझकर बंद किए गए थे और फर्जी मजदूरों की अटेंडेंस लगाकर पैसा निकाला गया। वहीं जशपुर के कोनपारा में 6.55 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता मिली, जहाँ रिकॉर्ड में धान खरीदा गया लेकिन गोदामों तक कभी पहुँचा ही नहीं।
PNN24 न्यूज़ का सवाल: छत्तीसगढ़ सरकार ने 14 नवंबर 2025 से अब तक 93 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा है और 20,753 करोड़ रुपये किसानों को दिए हैं। लेकिन इस भारी-भरकम खरीद का कितना हिस्सा मिलों और राशन की दुकानों तक पहुँच रहा है और कितना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है? अगर चूहे और पक्षी करोड़ों का धान खा रहे हैं, तो ये छत्तीसगढ़ के सबसे ‘अमीर’ जीव बन चुके हैं।











