चीन में ‘जनसंख्या का आपातकाल’: लगातार चौथे साल घटी आबादी, 1949 के बाद सबसे कम जन्म दर; क्या बूढ़ा हो रहा है ‘ड्रैगन’?

शफी उस्मानी
डेस्क: दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन इस समय अपने अस्तित्व के सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों ने बीजिंग की नींद उड़ा दी है। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 के अंत तक चीन की आबादी 33.9 लाख कम होकर 140 करोड़ पर सिमट गई है। यह लगातार चौथा साल है जब चीन की जनसंख्या में गिरावट दर्ज की गई है।

‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ से ‘थ्री चाइल्ड’ तक का सफर रहा नाकाम: चीन ने 1979 में बढ़ती आबादी को रोकने के लिए सख्त ‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ लागू की थी। लेकिन अब परिणाम उलटे आ रहे हैं:
- 2016: वन चाइल्ड पॉलिसी खत्म कर दो बच्चों की अनुमति दी गई।
- 2021: स्थिति न सुधरने पर तीन बच्चों की इजाजत दी गई।
- 2025: भारी आर्थिक रियायतों के बावजूद युवा शादी और बच्चे पैदा करने से बच रहे हैं।
सरकार की ‘कैश’ स्कीम और विवादित टैक्स: आबादी बढ़ाने के लिए शी जिनपिंग सरकार अब हर मुमकिन कोशिश कर रही है:
- नकद प्रोत्साहन: 3 साल से कम उम्र के हर बच्चे के माता-पिता को 3,600 युआन (लगभग 47,000 रुपये) देने की घोषणा की गई है।
- छुट्टियां: कई प्रांतों में मैटरनिटी लीव (मातृत्व अवकाश) को बढ़ा दिया गया है।
- विवादित कदम: सरकार ने कंडोम और गर्भनिरोधक गोलियों पर 13% नया टैक्स लगा दिया है ताकि लोग सुरक्षा साधनों का इस्तेमाल कम करें। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अनचाहे गर्भ और एचआईवी (HIV) फैलने का खतरा बढ़ सकता है।
क्यों नहीं बढ़ रही आबादी? अर्थशास्त्रियों का मानना है कि चीन में बढ़ती महंगाई, बच्चों की पढ़ाई का भारी खर्च और धीमी पड़ती अर्थव्यवस्था की वजह से युवा परिवार बढ़ाने से डर रहे हैं। सिर्फ चीन ही नहीं, बल्कि दक्षिण कोरिया, सिंगापुर और ताइवान जैसे एशियाई देश भी इसी संकट से जूझ रहे हैं। अगर यही रफ्तार रही, तो भविष्य में चीन के पास काम करने वाले युवाओं की कमी हो जाएगी और बुजुर्गों की बढ़ती संख्या अर्थव्यवस्था पर बोझ बन जाएगी।










