दालमंडी चौड़ीकरण पर मचा रार: वाराणसी के दुकानदारों ने बुलंद की आवाज, पोस्टर लगाकर बोले— ‘सरकार से हमारी यही मांग, दुकान के बदले दुकान’

तारिक आज़मी 

वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बुनियादी ढांचे के विकास की कवायद जारी है, लेकिन इसी के साथ पुराने इलाकों के वजूद को लेकर संघर्ष भी तेज हो गया है। ताजा मामला शहर के मशहूर व्यापारिक केंद्र दालमंडी का है। प्रशासन द्वारा दालमंडी के चौड़ीकरण (Widening) की प्रशासनिक कवायद के बीच स्थानीय दुकानदारों ने अपना विरोध दर्ज कराने के लिए एक अनोखा रास्ता अपनाया है।

दुकानों पर चस्पा हुए पोस्टर: दालमंडी की तंग गलियों में अब चारों तरफ पीले और सफेद रंग के पोस्टर नजर आ रहे हैं। इन पोस्टरों पर स्पष्ट शब्दों में लिखा है— ‘सरकार से हमारी यही मांग, दुकान के बदले दुकान’। व्यापारियों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनकी रोजी-रोटी छीनकर किया जाने वाला विकास उन्हें मंजूर नहीं।

क्या कहते हैं स्थानीय लोग और दुकानदार? दालमंडी के व्यापारियों और निवासियों ने PNN24 News से बात करते हुए अपना दर्द साझा किया:

  • नसतइन अहमद (स्थानीय निवासी): “यह इलाका सदियों पुराना है और यहाँ के लोग इसी व्यापार पर निर्भर हैं। प्रशासन चौड़ीकरण की बात तो कर रहा है, लेकिन हमारे भविष्य का क्या? बिना ठोस पुनर्वास नीति के हम अपनी छत और दुकान नहीं छोड़ सकते।”
  • फरीद अहमद (स्थानीय दुकानदार): “हम सरकार से केवल इतना चाहते हैं कि अगर हमारी दुकानें तोड़ी जाती हैं, तो हमें उसी इलाके में या किसी प्रमुख स्थान पर ‘दुकान के बदले दुकान’ दी जाए। हम मुआवज़ा नहीं, अपना रोजगार वापस चाहते हैं।”
  • फैजी उर्फ बाबू नकाब (स्थानीय दुकानदार): “दालमंडी का अपना एक ऐतिहासिक और व्यापारिक महत्व है। यहाँ के छोटे दुकानदार पहले से ही मंदी की मार झेल रहे हैं। अगर प्रशासन जबरन तोड़-फोड़ करता है, तो हजारों परिवारों के सामने दाने-दाने की नौबत आ जाएगी।”

प्रशासनिक रुख: वाराणसी विकास प्राधिकरण और जिला प्रशासन का तर्क है कि दालमंडी जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियों के पहुँचने के लिए चौड़ीकरण अनिवार्य है। सुरक्षा की दृष्टि से यहाँ सड़कों को चौड़ा करना समय की मांग है।

हालाँकि, दुकानदारों के इस ‘पोस्टर वार’ ने प्रशासन को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया है। अब देखना यह है कि प्रशासन व्यापारियों की इस मांग पर क्या बीच का रास्ता निकालता है।

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