‘मियां’ शब्द पर घमासान: लेखक हर्ष मंदर ने दिल्ली में CM हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ दी तहरीर; मुख्यमंत्री बोले— “यह नाम मैंने नहीं, उन्होंने खुद दिया है”

दिल्ली: लेखक हर्ष मंदर ने असम के CM हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ दर्ज कराई पुलिस शिकायत। 'मियां' शब्द के इस्तेमाल और नफरत फैलाने का आरोप। CM ने पलटवार कर पूछा— "अगर मैं मियां-मियां कह रहा हूँ, तो विपक्ष असमिया-असमिया कहे।"

आदिल अहमद 

नई दिल्ली/गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बयानों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। मशहूर लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर ने मुख्यमंत्री के खिलाफ दिल्ली के हौज़ खास पुलिस स्टेशन में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। मंदर का आरोप है कि मुख्यमंत्री के बयान असम में बंगाली भाषी मुसलमानों के खिलाफ नफरत, उत्पीड़न और सामाजिक भेदभाव को बढ़ावा दे रहे हैं।

शिकायत में क्या है आरोप? हर्ष मंदर ने अपनी शिकायत में 27 जनवरी को तिनसुकिया जिले के डिगबोई में हुए एक आधिकारिक कार्यक्रम का जिक्र किया है। शिकायत के मुताबिक:

  • मुख्यमंत्री ने जानबूझकर ‘मियां’ शब्द का इस्तेमाल किया, जिसे बंगाली भाषी मुसलमानों के लिए अपमानजनक माना जाता है।
  • उनके बयानों से ऐसा माहौल बन रहा है जिससे इन समुदायों के नाम मतदाता सूची से हटाने और उनके सामाजिक बहिष्कार को बल मिलता है।
  • मंदर ने पुलिस से इस मामले में तुरंत एफ़आईआर दर्ज करने की मांग की है।

मुख्यमंत्री का पलटवार: “विपक्ष कहे असमिया-असमिया” विवाद बढ़ने पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुरुवार को पत्रकारों के सवालों का बेबाकी से जवाब दिया। जब उनसे पूछा गया कि उनके ‘मियां’ बोलने से विपक्ष संतुष्ट नहीं है, तो उन्होंने कहा:

“इसमें असंतोष की क्या बात है? जो लोग बांग्लादेश से आए हैं, वे खुद को ही ‘मियां’ कहते हैं। यह नाम मैंने नहीं दिया, उन्होंने खुद को दिया है। वे खुद कहते हैं कि हमें मियां बोलिए।”

विपक्ष के आरोपों पर तंज कसते हुए उन्होंने आगे कहा, “अगर मैं ‘मियां-मियां’ कर रहा हूँ, तो विपक्ष को ‘असमिया-असमिया’ कहना चाहिए। इसमें किसी को आपत्ति क्यों होनी चाहिए?”

असम की राजनीति में ‘मियां’ शब्द का महत्व: बता दें कि असम में ‘मियां’ शब्द का इस्तेमाल लंबे समय से राजनीतिक ध्रुवीकरण का केंद्र रहा है। मुख्यमंत्री का तर्क है कि वे राज्य की स्वदेशी ‘असमिया’ संस्कृति की रक्षा कर रहे हैं, जबकि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस तरह की शब्दावली एक विशेष समुदाय को हाशिए पर धकेलने का काम करती है।

हमारी निष्पक्ष पत्रकारिता को कॉर्पोरेट के दबाव से मुक्त रखने के लिए आप आर्थिक सहयोग यदि करना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें


Welcome to the emerging digital Banaras First : Omni Chanel-E Commerce Sale पापा हैं तो होइए जायेगा..

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *