इंदौर जल त्रासदी: ‘बहुत देर कर दी, हुजुर आते आते’, एक्शन मोड में नए निगमायुक्त क्षितिज सिंघल; प्राथमिकता सुरक्षित पानी और बुनियादी ढांचे में सुधार

तारिक खान
इंदौर: मध्य प्रदेश की व्यापारिक राजधानी इंदौर में दूषित पानी के कारण हुई मौतों और बीमारी के बाद प्रशासनिक फेरबदल के साथ ही नई कार्ययोजना पर काम शुरू हो गया है। नगर निगम के नव-नियुक्त आयुक्त क्षितिज सिंघल ने पदभार संभालते ही अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने जोर दिया है कि प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना उनकी सबसे बड़ी चुनौती और प्राथमिकता है।

- दूषित पानी के प्रभाव को कम करने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में क्लोरीन टैबलेट का वितरण किया जा रहा है।
- जब तक पाइपलाइन का पानी सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक टैंकरों के जरिए पीने योग्य पानी की आपूर्ति की जा रही है।
- निगम की टीमें लोगों को पानी उबालकर पीने और स्वच्छता बनाए रखने के लिए जागरूक कर रही हैं।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और पाइपलाइन की स्टडी: आयुक्त ने स्वीकार किया कि समस्या की जड़ बुनियादी ढांचे में है। उन्होंने कहा:
“दूसरी बड़ी समस्या इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी है, जो सीधे तौर पर पाइपलाइन की स्थिति और उनके जाल से संबंधित है। हम इस पूरे सिस्टम की स्टडी कर रहे हैं ताकि भविष्य में सीवरेज और पेयजल पाइपलाइन के आपस में मिलने (क्रॉस-कंटामिनेशन) जैसी घटनाओं को रोका जा सके।”
दिलीप यादव के तबादले के बाद नई जिम्मेदारी: उल्लेखनीय है कि भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से 8 लोगों की मौत और सैकड़ों के बीमार होने के बाद सरकार की भारी किरकिरी हुई थी। इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोपों के बीच शुक्रवार को तत्कालीन निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव का तबादला कर दिया गया था, जिसके बाद आईएएस क्षितिज सिंघल को इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए चुना गया है।











