महाराष्ट्र: इंसाफ में देरी पड़ी भारी! कलेक्टर की गाड़ी और फर्नीचर कुर्क करने का वारंट जारी; 2.22 करोड़ के मुआवजे पर कोर्ट का सख्त रुख

ईदुल अमीन 

डेस्क: महाराष्ट्र की एक सिविल कोर्ट ने प्रशासन की ढिलाई पर कड़ा रुख अपनाते हुए कलेक्टर की चल संपत्ति अटैच (कुर्क) करने का वारंट जारी किया है। अदालत के इस आदेश के मुताबिक, यदि किसान को तय मुआवजा नहीं दिया गया, तो कलेक्टर ऑफिस की गाड़ियां और फर्नीचर तक जब्त किए जा सकते हैं।

क्या है पूरा मामला? यह विवाद साल 2006 के एक भूमि अधिग्रहण मामले से जुड़ा है। एक सिंचाई प्रोजेक्ट के लिए बजरंग हरिचंद टाटू नामक किसान की जमीन अधिग्रहित की गई थी। जिला प्रशासन ने जमीन तो ले ली, लेकिन अतिरिक्त मुआवजे के भुगतान में टालमटोल की।

  • अदालत का फैसला: औरंगाबाद की सिविल कोर्ट (सीनियर डिवीजन) ने किसान के पक्ष में फैसला सुनाते हुए सरकार को 2 करोड़, 22 लाख, 61 हजार 19 रुपये देने का आदेश दिया था।
  • अवमानना: तीन साल बीत जाने के बाद भी जब प्रशासन ने भुगतान नहीं किया, तो कोर्ट ने अब ‘वारंट ऑफ अटैचमेंट’ (Warrant of Attachment) जारी कर दिया है।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी: सिविल कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि जब तक किसी उच्च न्यायालय (High Court) का स्टे (रोक) नहीं आता, तब तक इस वारंट का पालन सुनिश्चित किया जाए। कोर्ट ने प्रशासन की उस दलील को भी दरकिनार कर दिया जिसमें देरी के प्रशासनिक कारण गिनाए गए थे।

प्रशासन की सफाई और अपील: मामला बिगड़ता देख लघु सिंचाई विभाग ने कोर्ट में लिखित आश्वासन दिया है कि आगामी 8 हफ्तों के भीतर किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा मिल जाएगा। विभाग के इंजीनियर ने अदालत से अपील की है कि इस अवधि के दौरान सरकारी संपत्तियों की जब्ती पर रोक लगाई जाए ताकि प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों

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