महाराष्ट्र: अमरावती में प्रार्थना सभा के दौरान पादरी सुधीर विलियम गिरफ्तार; VHP और बजरंग दल की शिकायत पर पुलिस का बड़ा एक्शन, पादरी की गिरफ्तारी पर ‘सियासी’ उबाल: केरल के CM और कांग्रेस ने बीजेपी को घेरा

शफी उस्मानी

अमरावती/वरुड: महाराष्ट्र के अमरावती जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ पुलिस ने धर्मांतरण के आरोपों और स्थानीय विरोध के बीच पादरी सुधीर विलियम को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई मंगलवार को अमरावती शहर से लगभग 80 किलोमीटर दूर वरुड इलाके में की गई, जब पादरी एक सार्वजनिक सभा को संबोधित कर रहे थे।

क्या है पूरा मामला? मिली जानकारी के अनुसार, वरुड के रितेश बॉन्ड्रे के घर के सामने एक टेंट लगाकर सभा का आयोजन किया जा रहा था। स्थानीय निवासी लक्ष्मण शेडे की शिकायत के मुताबिक, इस बैठक को लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने कड़ी आपत्ति जताई थी। हिंदूवादी संगठनों का आरोप था कि इस सभा की आड़ में संदिग्ध गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।

हंगामे के बाद पुलिस की एंट्री: सभा स्थल पर कार्यकर्ताओं के विरोध और तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस ने लक्ष्मण शेडे की आधिकारिक शिकायत पर संज्ञान लेते हुए पादरी सुधीर विलियम को हिरासत में ले लिया। पादरी के समर्थन में आए कई अन्य लोगों ने जब गिरफ्तारी का विरोध किया, तो पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में ले लिया है।

पुलिस का बयान: अमरावती पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि मामला दर्ज कर लिया गया है और सभा के उद्देश्य की जांच की जा रही है। इलाके में शांति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या इस सभा के लिए प्रशासन से आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं।

पादरी की गिरफ्तारी पर ‘सियासी’ उबाल: केरल के CM और कांग्रेस ने बीजेपी को घेरा

महाराष्ट्र के अमरावती में पादरी सुधीर विलियम और उनके समर्थकों की गिरफ्तारी का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ चुका है। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और कांग्रेस के दिग्गज नेता केसी वेणुगोपाल सहित कई विपक्षी नेताओं ने इस कार्रवाई को अल्पसंख्यकों पर हमला बताते हुए बीजेपी सरकार की कड़ी आलोचना की है। हालांकि, कानूनी मोर्चे पर राहत मिलते हुए अदालत ने गिरफ्तार किए गए सभी लोगों को रिहा करने का आदेश दे दिया है।

पिनाराई विजयन: “ध्रुवीकरण की कोशिश” केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इस घटना को “बेहद परेशान करने वाला” करार दिया। उन्होंने संघ परिवार पर निशाना साधते हुए कहा:

“यह अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर ध्रुवीकरण बढ़ाने की एक चिंताजनक प्रवृत्ति है। ऐसी कार्रवाइयां संविधान द्वारा दी गई धार्मिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करती हैं।”

केसी वेणुगोपाल: “बीजेपी राज्यों में ईसाइयों को बनाया जा रहा निशाना” कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बीजेपी पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी शासित राज्यों में ईसाइयों को चुन-चुनकर परेशान किया जा रहा है। वेणुगोपाल ने कहा:

“धर्मांतरण के झूठे बहाने बनाकर राज्य की मशीनरी का इस्तेमाल ईसाइयों को प्रताड़ित करने के लिए किया जा रहा है। यह साफ संकेत है कि बीजेपी सत्ता का दुरुपयोग कर सांप्रदायिक जहर फैला रही है।”

पीएम मोदी को लिखा पत्र: केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने इस मामले में सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि रात 8 बजे प्रार्थना सभा के बीच में की गई गिरफ्तारियां संविधान के अनुच्छेद 25 (धर्म को मानने और प्रचार करने की आजादी) का खुला उल्लंघन हैं।

अदालत का फैसला और पुलिस की धाराएं: अमरावती पुलिस ने पादरी और उनके समर्थकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना) और धारा 302 (धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इरादे से शब्द कहना) के तहत मामला दर्ज किया था। मामले की सुनवाई के बाद, अदालत ने पुलिस की दलीलों को पर्याप्त न मानते हुए सभी अभियुक्तों को रिहा कर दिया है। अदालत के इस फैसले को विपक्षी दलों ने न्याय की जीत बताया है।

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